
नई दिल्ली ।इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platforms) बच्चों के लिए शिक्षा, मनोरंजन और संवाद का माध्यम जरूर बने हैं, लेकिन इनके बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन सुरक्षा (Online Safety) से जुड़ी गंभीर चुनौतियां (Challenges) भी सामने आ रही हैं। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक, पिछले एक साल में दुनिया के करीब दो करोड़ बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण (Online Abuse) या उत्पीड़न जैसी गतिविधियों का सामना किया। अध्ययन में यह भी संकेत दिया गया है कि वास्तविक संख्या (Actual Number) इससे अधिक हो सकती है।
यह अध्ययन 21 देशों में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले करीब 21 हजार बच्चों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है। इसमें ब्राजील और पाकिस्तान के अलावा केन्या और सर्बिया जैसे देश शामिल थे। बच्चों से जुड़े आंकड़े 2020 से 2025 के बीच एकत्र किए गए। भारत इस अध्ययन का हिस्सा नहीं था, इसलिए इसके आंकड़ों को भारत के बच्चों की स्थिति का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
अध्ययन में 12 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों और उनके अनुभवों को प्रमुखता से देखा गया। आंकड़ों के अनुसार करीब डेढ़ करोड़ बच्चे अनचाहे और आपत्तिजनक यौन कंटेंट के संपर्क में आए। लगभग 90 लाख बच्चों ने ऐसी ऑनलाइन बातचीत या संपर्क का सामना किया, जिसमें उन पर यौन प्रकृति की बातचीत के लिए दबाव डाला गया।
ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में सोशल मीडिया प्रमुख माध्यम के तौर पर सामने आया। अध्ययन के अनुसार रिपोर्ट किए गए गलत व्यवहार के करीब 60 प्रतिशत मामले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े थे। फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार की घटनाएं दर्ज की गईं।
ऑनलाइन गेमिंग से भी खतरा जुड़ा हुआ पाया गया। करीब 14 प्रतिशत गलत व्यवहार के मामले गेमिंग प्लेटफॉर्म से संबंधित थे। गेमिंग के दौरान बच्चों का दूसरे उपयोगकर्ताओं से संपर्क होता है, जिससे अनुचित बातचीत और शोषण का जोखिम बढ़ सकता है।
अध्ययन की एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाला व्यक्ति हमेशा कोई अनजान ऑनलाइन संपर्क नहीं था। आधे से अधिक मामलों में ऐसा व्यक्ति शामिल था, जिसे बच्चा पहले से जानता था। इनमें दोस्त, रिश्तेदार और पार्टनर जैसे परिचित लोग भी शामिल थे। इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और परिवारों के सामने चुनौती और गंभीर हो जाती है।
आंकड़ों के अनुसार 38 प्रतिशत बच्चों ने बताया कि उन्होंने पहली बार ऑनलाइन ऐसी यौन गतिविधि या उत्पीड़न का सामना किया। अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और पूर्वी यूरोप में 12 से 17 वर्ष के पांच में से एक से अधिक बच्चों ने कम से कम एक प्रकार के ऑनलाइन यौन शोषण का अनुभव बताया।
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से पैदा हो रहे नए जोखिमों को लेकर भी चिंता जताई गई है। नौ देशों से जुटाए गए आंकड़ों में अनुमानित 11 लाख बच्चों ने बताया कि उनकी आपत्तिजनक एआई से तैयार तस्वीरें या वीडियो बनाए गए। इससे बच्चों की डिजिटल पहचान और मानसिक सुरक्षा को लेकर नई चुनौती सामने आई है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए परिवार, स्कूल, तकनीकी कंपनियों और प्रशासन के स्तर पर लगातार जागरूकता और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है। बच्चों को निजी जानकारी साझा करने, संदिग्ध संपर्कों और अनुचित सामग्री से जुड़े जोखिमों की जानकारी देना जरूरी है। साथ ही किसी भी शिकायत पर समय रहते कार्रवाई और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत सुरक्षा उपाय बच्चों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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