
नई दिल्ली ।नेपाल में हाल में आई विनाशकारी बाढ़ (Flood) के बाद हालात अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं और लापता लोगों की संख्या भी हजारों में बनी हुई है। इस बीच त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना (Hydropower Project) की सुरंग में काम कर रहे 265 कर्मचारियों (Employees) को कथित तौर पर संकट के समय अंदर छोड़कर एक चीनी अधिकारी (Chinese Official) के वहां से चले जाने का मामला सामने आया है।
पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी राज छेत्री ने बताया कि बाढ़ से पहले सुरंग के भीतर मौजूद मजदूरों ने एक तेज आवाज सुनी थी। इसके बाद कर्मचारियों ने अपने चीनी सुपरवाइजर से सुरंग से बाहर निकलने की अनुमति मांगी। कर्मचारी का आरोप है कि अधिकारी मजदूरों को सुरंग के अंदर ही छोड़कर वहां से निकल गया।
इस घटना के बाद सुरंग में फंसे कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। परियोजना में काम करने वाले कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल के लिए सुरंग तक पहुंचना और उसके भीतर आगे बढ़ना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारत अब नेपाल के बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय सुरंग बचाव दल नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे पावर हाउस में बचाव अभियान चला रहा है। भारतीय दूत ने गुरुवार को स्याब्रूबेसी स्थित भारतीय टनल बचाव दल के आधार शिविर का दौरा किया और अभियान की प्रगति की जानकारी ली।
बचाव दल ने विशेष उपकरणों की मदद से सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक के हिस्से का जायजा लिया है। इसके बाद सुरंग के अंदर आगे बढ़ने के लिए भारी उपकरण पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय और नेपाली दलों ने अभियान जारी रखने की बात कही है।
नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही का असर कई जिलों में देखा जा रहा है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश के कारण एक बार फिर जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के अलावा रसुवा और नुवाकोट जिलों से होकर गुजरने वाली छोटी नदियों और जलधाराओं में भी पानी बढ़ सकता है।
इस बीच हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। चीन के एक वरिष्ठ जलवायु अधिकारी ने तिब्बती पठार पर ग्लेशियरों के और अस्थिर होने की आशंका जताई है। उनके अनुसार इससे तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन से अचानक बाढ़ आई थी। इसका असर उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में पड़ा। इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और व्यापक नुकसान हुआ।
चीन के राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के उप निदेशक गाओ रोंग के अनुसार पिछले 60 वर्षों में तिब्बती पठार का ग्लेशियर क्षेत्र करीब 24 प्रतिशत कम हुआ है और लगभग 7,000 छोटे ग्लेशियर पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। ऐसे बदलाव हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं।
नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के वितरण में व्यवस्था और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सिंगल विंडो नीति लागू की है। अब निजी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को राहत सामग्री सीधे नेपाल ले जाने या भेजने से पहले अनुमति लेनी होगी। सीमा पर आवश्यक प्रक्रिया और कस्टम शुल्क पूरा करने के बाद ही राहत सामग्री ले जाने की मंजूरी दी जाएगी।
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