मुंबई। अभिनेत्री तारा सुतारिया (Tara Sutaria) ने हाल ही में अपने स्वास्थ्य से जुड़ी एक ऐसी स्थिति के बारे में खुलासा किया है, जिसके कारण उन्हें संख्याओं और गणित (Numbers and Mathematics) से जुड़े कामों में परेशानी होती है। अभिनेत्री ने बताया कि वह डिस्कैलकुलिया (Dyscalculia) से जूझती हैं। यह एक प्रकार की लर्निंग डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को नंबर और गणितीय अवधारणाओं को समझने, याद रखने या उनका इस्तेमाल करने में अपेक्षाकृत अधिक कठिनाई हो सकती है।
डिस्कैलकुलिया को आम बोलचाल में कभी-कभी ‘मैथ डिस्लेक्सिया’ भी कहा जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इस स्थिति से प्रभावित व्यक्ति सामान्य रूप से बुद्धिमत्ता या अन्य क्षमताओं में कमजोर होता है। परेशानी मुख्य रूप से संख्याओं और गणित से जुड़े कार्यों में हो सकती है।
तारा सुतारिया ने बताया कि उनके पिता इस मामले में उनके सबसे बड़े सपोर्टर हैं। वह उनके अकाउंट्स से जुड़े हिसाब-किताब और जरूरी वित्तीय लेन-देन में मदद करते हैं। तारा ने बताया कि वह पिता के साथ बैठकर संबंधित चीजों को समझती हैं। इसके अलावा उनकी अकाउंट टीम भी उन्हें सहयोग करती है।
डिस्कैलकुलिया में कैसी परेशानियां हो सकती हैं?
डिस्कैलकुलिया में हर व्यक्ति के लक्षण एक जैसे नहीं होते। संभावित परेशानियों में शामिल हैं—
नंबर पहचानने या गिनती करने में कठिनाई।
जोड़, घटाव, गुणा और भाग करने में परेशानी।
संख्याओं का क्रम याद रखने में दिक्कत।
समय, तारीख या दूरी का अनुमान लगाने में कठिनाई।
पैसों का हिसाब-किताब और लेन-देन समझने में परेशानी।
घड़ी देखकर समय समझने में कठिनाई।
इसके अलावा मानसिक गणना करने, गणितीय संकेतों को समझने और संख्याओं को याद रखने में भी कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है।
बच्चों में कैसे पहचानें?
डिस्कैलकुलिया के संकेत बचपन में दिखाई दे सकते हैं। अगर कोई बच्चा लगातार गणित से जुड़ी गतिविधियों में असामान्य कठिनाई महसूस करता है, नंबरों का क्रम याद रखने में परेशानी होती है या समय और पैसों से संबंधित सामान्य काम समझने में दिक्कत होती है, तो अभिभावकों को उसकी परेशानी को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
हालांकि, केवल गणित में कमजोर होने को डिस्कैलकुलिया नहीं माना जा सकता। सही आकलन के लिए विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
क्या इसका इलाज संभव है?
डिस्कैलकुलिया को सामान्य बीमारी के बजाय सीखने से जुड़ी एक स्थिति माना जाता है। इसके लिए व्यक्ति की जरूरत के अनुसार विशेष शैक्षणिक रणनीतियों, थेरेपी और अन्य सहायता का इस्तेमाल किया जा सकता है। शुरुआती स्तर पर पहचान होने से बच्चे को उसकी कठिनाइयों से निपटने के लिए बेहतर सहयोग दिया जा सकता है।
विशेषज्ञ की मदद से गणित और रोजमर्रा के हिसाब-किताब से जुड़ी गतिविधियों को आसान बनाने के तरीके विकसित किए जा सकते हैं। इसलिए किसी बच्चे में ऐसे लगातार संकेत दिखाई दें तो उसे डांटने या दबाव डालने के बजाय विशेषज्ञ से मूल्यांकन और उचित मार्गदर्शन लेना बेहतर है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved