
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने यूक्रेन (Ukraine) के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (President Volodymyr Zelenskyy) पर निशाना साधते हुए कहा है कि यूक्रेन को अब नया राष्ट्रपति चुन लेना चाहिए। ट्रंप रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों से नाराज हैं। उनका आरोप है कि जेलेंस्की के पास रूस के साथ समझौता करने के कई मौके थे, लेकिन उन्होंने हर बार उन्हें गंवा दिया।
ट्रंप का मानना है कि रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से वैश्विक ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस की ओर से यूक्रेन पर हमले जारी हैं। वहीं, रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले को लेकर भी विवाद बढ़ रहा है।
‘ऐसा नेता चाहिए, जो रूस से समझौता कर सके’
ट्रंप पहले भी जेलेंस्की को रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की सलाह दे चुके हैं। उनका कहना है कि ऐसे हमलों का असर केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर में ईंधन की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
ट्रंप की नाराजगी की एक वजह यह भी है कि उनके मुताबिक जेलेंस्की रूस के साथ समझौता करने के कई अवसर गंवा चुके हैं। अब उन्होंने यूक्रेन में नया राष्ट्रपति चुने जाने की बात कही है। ट्रंप चाहते हैं कि यूक्रेन का नेतृत्व ऐसा व्यक्ति करे, जो रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ सके।
रूस के हमलों में 20 लोगों की मौत, तीन बच्चे भी शामिल
यूक्रेन पर रूस के हमले लगातार जारी हैं। शनिवार को जापोरिज्जिया क्षेत्र में रूसी हवाई हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल हैं, जबकि 18 लोग घायल हुए हैं।
रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव को भी मिसाइल हमले का निशाना बनाया। इस हमले में चार लोग घायल हुए। रूसी हमलों में रिहायशी इलाकों के साथ ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है। इन हमलों के बीच ट्रंप का जेलेंस्की पर बयान दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी रुख पर नई बहस छेड़ सकता है।
रूस से डीजल खरीदेगा अमेरिका, यूक्रेन ने जताई चिंता
ट्रंप ने शुक्रवार को रूस से डीजल खरीदने के समझौते का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि रूस अमेरिका को तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन डीजल और आगे भी बड़ी मात्रा में ईंधन की आपूर्ति की जाएगी।
इस फैसले को लेकर यूक्रेन ने चिंता जताई है। उसकी आशंका है कि डीजल की बिक्री से रूस को होने वाली कमाई का इस्तेमाल युद्ध जारी रखने के लिए किया जा सकता है। यह समझौता इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि अमेरिका पहले रूस पर दबाव बनाने के लिए प्रतिबंधों का समर्थन करता रहा है।
यूरोप के कुछ देशों ने भी इस फैसले पर चिंता जताई है। स्वीडन का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई रूस के युद्ध खर्च में अहम भूमिका निभाती है। वहीं, जर्मनी ने रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को जारी रखने की बात कही है।
समझौते को लेकर ट्रंप और जेलेंस्की के बीच मतभेद
रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले और जेलेंस्की को लेकर ट्रंप की टिप्पणी से दोनों नेताओं के बीच मतभेद फिर सामने आए हैं। ट्रंप चाहते हैं कि यूक्रेन रूस के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़े। दूसरी ओर, जेलेंस्की का रुख है कि रूस पर दबाव कम करने से उसके हमले रुकने के बजाय और तेज हो सकते हैं। इस तरह युद्ध खत्म करने के रास्ते को लेकर दोनों नेताओं की सोच अलग-अलग नजर आ रही है। जहां ट्रंप समझौते पर जोर दे रहे हैं, वहीं यूक्रेन रूस पर दबाव बनाए रखने को जरूरी मानता है।
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