
नई दिल्ली: चुनाव आयोग को लेकर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के बाद विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव बढ़ गया है. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग को हाईजैक करने का आरोप लगाया. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि असहमतियां प्रक्रिया का हिस्सा हैं लेकिन सारे फैसले सहमति से लिए गए हैं.
चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करता है, आयोग के मुताबिक, उसके भीतर लिखित नोट, आपसी चर्चा और आंतरिक चेक एंड बैलेंस की व्यवस्था सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय आना सामान्य बात है. आयोग के मुताबिक, निर्णय लिए जाने से पहले अधिकारी और सदस्य अपने सवाल, सुझाव या आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं.
चुनाव आयोग ने साफ किया कि तीनों चुनाव आयुक्तों में से प्रत्येक को सुझाव देने और अपनी राय रखने का अधिकार है, इसलिए आंतरिक चर्चा के दौरान सामने आई अलग-अलग राय को अंतिम फैसले से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा. आयोग ने कहा कि पिछले 10 महीनों के केवल कुछ आंतरिक नोट्स को सामने रखकर बाकी फैसलों और कामकाज को नजरअंदाज करना पूरी तस्वीर पेश नहीं करता.
चुनाव आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल और कई चुनाव सुधार किए गए हैं, इनमें पूरे देश में लागू किया गया विशेष गहन पुनरीक्षण यानी भी शामिल है. आयोग का दावा है कि ये सभी फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं.
चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक आदेशों और फैसलों को लेकर भी सफाई दी. चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश और फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं. आयोग ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 324 के साथ-साथ The Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 का हवाला दिया. आयोग का कहना है कि आंतरिक स्तर पर किसी प्रस्ताव या ड्राफ्ट पर सवाल उठना और अंतिम निर्णय के बीच अंतर समझना जरूरी है… अंतिम आदेश निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही जारी किए जाते हैं.
मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर चुनाव आयोग ने कहा कि यह काम संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) अपने कानूनी अधिकारों के तहत करते हैं. चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet का भी जिक्र किया और कहा कि ये प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं. आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित कानूनी अधिकारों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होती है.
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग में फैसले बहुमत से होते हैं, लेकिन CEC ने अपने सहयोगियों को भ्रमित करते हुए आयोग को हाईजैक कर लिया. उन्होंने Form 6 में कथित बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इन आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग ने कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है. आयोग ने हाल में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव कराए जाने का भी जिक्र किया.
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