भोपाल

मप्र में 10 साल में 75 फीसदी तक बढ़े बिजली के दाम

भोपाल। बिजली कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए बिजली के दाम में तेजी से इजाफा किया है। पिछले दस साल में कंपनी ने 75 फीसदी तक बिजली की दरों में बढ़ोतरी की है। सबसे ज्यादा इजाफा कृषि उपभोक्ता को मिलने वाली बिजली के दाम बढ़े है। इसके बाद उद्योग में उपयोग होने वाली बिजली 68 फीसदी तक घरेलू बिजली में 58 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इस बार फिर वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए बिजली कंपनी ने 3915 करोड़ का घाटा दिखाकर मौजूदा दर में औसत 8.71 फीसदी दाम बढ़ाने का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग का दिया है। यदि मप्र विद्युत नियामक आयोग ने पावर मैनेजमेंट कंपनी के प्रस्ताव को माना तो घरेलू बिजली की औसत दर 7.19 पैसे प्रति यूनिट हो जाएगी।


घरेलू बिजली की बात करे तो पिछले 10 साल में घरेलू बिजली की एक यूनिट 4.07 रुपए प्रति यूनिट से बढ़कर 6.42 रुपए तक पहुंच चुकी है। निम्न तबका महंगी बिजली से परेशान है हालांकि 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली सब्सिडी की वजह से उन पर बढ़े दाम का असर न के बराबर होगा। इसमें सबसे ज्यादा मुश्किल मध्यमवर्गीय परिवारों को होगी जिनकी मासिक खपत औसत 150 यूनिट से ज्यादा होती है।

चुनावी साल में मिली राहत
साल 2020 में कांग्रेस से वापस सत्ता भाजपा के हाथ में आई। इस दौरान बिजली दाम बढ़ाने का प्रस्ताव भी आ गया। सरकार को बचाने के लिए उप चुनाव होने थे लिहाजा दाम बढ़ाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। चुनाव के बाद दाम बढ़ाने का आदेश हुआ। ये संयोग अभी नहीं हुआ इससे पहले भी साल 2008 और 2009 में विधानसभा और लोकसभा चुनाव हुए। इस बीच बिजली कंपनी ने औसत इजाफा महज तीन पैसे का किया। इसके बाद 2013 और 2014 में फिर चुनाव आए। बिजली कंपनी ने इस साल दाम में औसत कटौती की। 2012-13 में जहां औसत बिजली की कीमत 4.66 पैसे प्रति यूनिट थी। वह घटकर 2013-14 में 4.35 पैसे प्रति यूनिट हो गई। वहीं 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले 5.85 पैसे प्रति यूनिट थी जो 2018-19 के लिए बढ़कर 5.95 रूपए तक पहुंची। करीब 10 पैसे का इजाफा किया। 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले मप्र में कांग्रेस की सरकार आई। बिजली कंपनी ने चुनाव के पहले प्रस्ताव बनाकर भेजा।मप्र विद्युत नियामक आयोग ने बढ़ोतरी को दिसंबर 2020 को 1.98 फीसद बढ़ोतरी को मंजूरी दी। दूसरी बार 30 जून को वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 0.69 फीसद बिजली के दाम बढ़ाने को आयोग ने मंजूर किया।

3500 करोड़ सालाना की फिजूलखर्ची
बिजली के बढ़ते दाम को लेकर एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार में मनमाने बिजली खरीदी के करार हुए। जिनसे बिजली लेने की जरूरत भी नहीं पड़ रही थी। ज्यादातर करार 25 साल के लिए है। प्रदेश में बिजली की औसत डिमांड 9-10 हजार मेगावाट है जबकि उपलब्धता 19 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है। बिजली मामलों के जानकार राजेन्द्र अग्रवाल की माने तो प्रदेश की बिजली कंपनी हर साल करीब 3500 करोड़ रुपए का भुगतान उन बिजली उत्पादन इकाईयों को करते हैं जिनसे एक यूनिट भी बिजली नहीं खरीदी जाती है। 

Share:

Next Post

बजट सत्र पर मंडराया कोरोना का साया!

Mon Jan 17 , 2022
कोरोना की स्थिति के अनुसार तय होगी सत्र की तारीख संसदीय कार्य मंत्री डा.नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री को भेजी तारीख तय करने संबंधी फाइल भोपाल। कोरोना संकट की स्थिति को देखते हुए विधानसभा का बजट सत्र कब से बुलाया जाएगा, यह तय होगा। संसदीय कार्य विभाग ने फरवरी के अंतिम सप्ताह से सत्र बुलाने का […]