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खेत छत्तीसगढ़ में, लोकेशन अफ्रीका के समंदर में… अजब-गजब कहानी

November 04, 2026

डेस्क: छत्तीसगढ़ में गिरदावरी का डिजिटल सिस्टम किसानों और पटवारियों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन गया है. सरकार ने इस बार खेतों के भौतिक सत्यापन के लिए नया पीवी (PV) ऐप लागू किया है. पटवारियों को खेत में जाकर फसल की तस्वीरें खींचनी हैं और GPS लोकेशन के साथ इसे ऐप पर अपलोड करना है. सरकार का उद्देश्य गिरदावरी में पारदर्शिता लाना और फसल नुकसान की स्थिति में सैटेलाइट व फील्ड डेटा के आधार पर किसानों को सटीक मुआवजा दिलाना है. हालांकि, तकनीकी खामियों के चलते यह व्यवस्था अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है.

इस डिजिटल व्यवस्था की गड़बड़ी का हैरान करने वाला मामला कवर्धा जिले से सामने आया है. यहां एक गांव की गिरदावरी के दौरान पूरे गांव की जमीन एक ही खसरे में दर्ज हो गई. यानी अलग-अलग खेतों की पहचान के बजाय ऐप में पूरे गांव को एक ही खेत नंबर के तहत दिखाया जाने लगा. इसी तरह भाठागांव में एक खेत की लोकेशन ऐप पर अपलोड की गई तो वह छत्तीसगढ़ में दिखने के बजाय अफ्रीका के समंदर के बीच पहुंच गई. ऐसी गड़बड़ियों ने पटवारियों को भी हैरान कर दिया है. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि ऐप में यह समस्या किस स्तर पर आ रही है.


  • नए पीवी ऐप में हर खेत की मेढ़ के चारों तरफ से तस्वीरें लेना अनिवार्य किया गया है. इसके साथ ही खेत की GPS लोकेशन कैप्चर कर उसी समय डेटा अपलोड करना होता है. लेकिन कई जगह सर्वर ठीक से काम नहीं कर रहा है. बार-बार अटकने और गलत लोकेशन दर्ज होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं. पटवारियों का कहना है कि ऐप को कहीं से भी ऑपरेट किया जा सकता है. ऐसे में खेत की सही मैपिंग करना चुनौती बन गया है. कई बार किसान की मौजूदगी के बिना खेत की वास्तविक स्थिति और उसकी सीमाओं का मिलान करना मुश्किल हो जाता है.

    पटवारियों को सबसे ज्यादा चिंता डिजिटल रिकॉर्ड की शुद्धता को लेकर है. उनका कहना है कि अगर एक बार गलत लोकेशन या गलत खसरा नंबर अपलोड हो गया तो भविष्य में उसे लेकर जमीन के विवाद खड़े हो सकते हैं. किसान के पास जमीन की वास्तविक लोकेशन का रिकॉर्ड होगा, जबकि ऐप में वही खेत कहीं और दिख सकता है.

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