
जबलपुर। कटंगी बाईपास स्थित ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि जबलपुर आरटीओ में पंजीकृत बस, ट्रक, हाइवा, ऑटो सहित सभी कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच आधुनिक और पारदर्शी तरीके से हो सके, लेकिन अब इस व्यवस्था पर ही सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कई वाहन मालिक अपने वाहनों को एटीएस सेंटर पर भौतिक रूप से लाए बिना ही कथित दलालों के माध्यम से फिटनेस प्रमाण पत्र हासिल कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जबलपुर संभाग के जबलपुर के अलावा मंडला, डिंडोरी और नरसिंहपुर जिलों के वाहन मालिक भी बड़ी संख्या में एटीएस सेंटर पहुंचने के बजाय अन्य स्थानों से फिटनेस कराने का रास्ता अपना रहे हैं। आरोप है कि कथित दलालों के माध्यम से ‘सेटिंगÓ कर वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाए जा रहे हैं। यदि यह स्थिति सही है तो इससे ऑटोमेटिक फिटनेस व्यवस्था की मूल मंशा पर ही सवाल खड़े होते हैं।
बिना वाहन जांच के प्रमाण पत्र मिलने का आरोप
सबसे गंभीर सवाल उन आरोपों को लेकर है, जिनमें कहा जा रहा है कि कुछ वाहनों के मालिक वाहन को एटीएस सेंटर पर लाए बिना ही फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त कर रहे हैं। वाहन की वास्तविक स्थिति की जांच किए बिना प्रमाण पत्र जारी होने की स्थिति में सड़क पर अनफिट वाहन दौडऩे का खतरा बढ़ सकता है। ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि वाहन की फिटनेस निर्धारित तकनीकी मानकों के आधार पर जांची जाए। ऐसे में यदि वाहन सेंटर तक पहुंचाए बिना प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं तो पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।
आरटीओ की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
इस मामले में परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग को कथित तौर पर इस तरह की गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वाहन मालिकों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि एटीएस व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाना है तो वाहनों की अनिवार्य भौतिक उपस्थिति, जांच प्रक्रिया की निगरानी और फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी।
अनफिट और कंडम वाहनों के सड़क पर दौडऩे का बड़ा खतरा
फिटनेस प्रमाण पत्र का उद्देश्य केवल कागजी औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सड़क पर चलने वाला वाहन सुरक्षित स्थिति में हो। यदि बिना वास्तविक जांच के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं तो इसका सीधा असर सड़क सुरक्षा पर पड़ सकता है। ऐसे में परिवहन विभाग को एटीएस सेंटर से जारी फिटनेस प्रमाण पत्रों की जांच, वाहनों की भौतिक उपस्थिति का रिकॉर्ड और कथित दलालों की भूमिका की पड़ताल करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि एटीएस सेंटर पर अपेक्षित संख्या में वाहन क्यों नहीं पहुंच रहे हैं और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हो सकते हैं।
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