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पूर्व सिंगापुर राजनयिक का पाकिस्तान पर तीखा हमला, 1991 विमान अपहरण का किस्सा सुनाकर उठाए नेतृत्व पर सवाल

July 04, 2026

नई दिल्ली। सिंगापुर (Singapore) के पूर्व विदेश सचिव और वरिष्ठ राजनयिक बिलहारी कौसिकन (Bilhari Kausikan) ने पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करते हुए 1991 में हुए एक विमान अपहरण की घटना का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस संकट के दौरान अपहर्ताओं की मांग पर जब तत्कालीन प्रधानमंत्री रह चुकी बेनज़ीर भुट्टो से संपर्क करने की कोशिश की गई, तब उनके आवास से जवाब मिला कि वह सो रही हैं और उन्हें परेशान नहीं किया जा सकता।

कौसिकन ने यह टिप्पणी नेशनल प्रेस फाउंडेशन की इंटरनेशनल रिपोर्टिंग फेलोशिप के दौरान पत्रकारों से बातचीत में की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मौजूदा समस्याओं के लिए भौगोलिक परिस्थितियों से अधिक उसके नेतृत्व और शासन व्यवस्था को जिम्मेदार माना जाना चाहिए।


  • विमान अपहरण की घटना का किया जिक्र

    कौसिकन ने मार्च 1991 में सिंगापुर एयरलाइंस की फ्लाइट SQ117 के अपहरण की घटना का उल्लेख किया। उनके अनुसार, चार पाकिस्तानी अपहर्ताओं ने विमान पर कब्जा कर लिया था और उनकी मांग थी कि उनकी बातचीत बेनज़ीर भुट्टो से कराई जाए।

    उन्होंने बताया कि उस समय वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा होने के नाते उन्होंने रात करीब तीन बजे भुट्टो के आवास पर फोन किया। उनका दावा है कि वहां मौजूद स्टाफ ने यह कहकर बातचीत कराने से इनकार कर दिया कि “मैडम सो रही हैं” और उन्हें जगाया नहीं जा सकता।

    सुरक्षा बलों ने खत्म किया संकट

    कौसिकन के अनुसार, बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद सिंगापुर के सुरक्षा बलों ने विमान पर विशेष अभियान चलाया। इस अभियान में चारों अपहर्ता मारे गए, जबकि सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया।

    उन्होंने कहा कि अपहर्ताओं की वास्तविक मंशा क्या थी, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका क्योंकि अभियान के दौरान सभी हमलावर मारे गए थे।

    पाकिस्तान के नेतृत्व और सेना पर टिप्पणी

    बातचीत के दौरान कौसिकन ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि देश के राजनेता प्रभावी नेतृत्व देने में विफल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना देश को एकजुट रखने में भूमिका निभाती है, लेकिन साथ ही वह कई समस्याओं का हिस्सा भी रही है।

    उनके अनुसार, पाकिस्तान की वर्तमान चुनौतियों के लिए केवल पड़ोसी देशों या भौगोलिक स्थिति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और राजनीतिक कमजोरियां भी इसके पीछे अहम कारण हैं।

    परमाणु हथियारों को लेकर भी दिया बयान

    पूर्व राजनयिक ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की रणनीतिक अहमियत काफी हद तक उसके परमाणु हथियारों से जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने वर्षों तक अपनी सामरिक स्थिति का इस्तेमाल वैश्विक शक्तियों से समर्थन और संसाधन हासिल करने के लिए किया, लेकिन इससे आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।

    कौसिकन ने पाकिस्तान में कट्टरपंथ और सुरक्षा चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। हालांकि, ये सभी टिप्पणियां उनके व्यक्तिगत आकलन और विचार हैं।

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