img-fluid

धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026 को SC में चुनौती, छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस

October 26, 2026

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की है. मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि राज्य के अधिकारियों को ईसाई समुदाय की धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करने से रोका जाए. खास तौर पर ईसाई त्योहारों और प्रार्थना सभाओं के दौरान कथित दखल पर रोक लगाने की मांग की गई है.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि नए कानून के प्रावधानों का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए किया जा सकता है. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि रविवार को चर्च में होने वाली प्रार्थना सभाओं पर भी अधिकारियों की ओर से कार्रवाई किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं. उन्होंने कानून की कुछ शर्तों को व्यापक बताते हुए कहा है कि इनका असर लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता पर पड़ सकता है.


  • छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 को राज्य विधानसभा ने मार्च 2026 में पारित किया था. अप्रैल में राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसने 1968 से लागू पुराने कानून की जगह ली. कानून में धर्मांतरण से संबंधित प्रक्रियाओं, सूचना देने और धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों के पंजीकरण जैसी शर्तें शामिल हैं. इसके कुछ प्रावधानों में गंभीर दंड का भी प्रावधान है.

    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून के कुछ प्रावधान अंतरात्मा की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, निजता और व्यक्तिगत आजादी जैसे संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं. इसी कानून को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई है. हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर को राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा था. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही का फैसला मामले को समझने में मददगार हो सकता है.

    Share:

  • सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved