
नई दिल्ली। चिप्स, नमकीन, मीठे पेय और दूसरे पैकेज्ड फूड (Packaged food) के पैकेट पर अब लाल रंग का चेतावनी लेबल (Red warning label) लगाने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के 13 सवालों के जवाब में FSSAI ने 23 सितंबर को 43 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है। इसमें एजेंसी ने बताया है कि ज्यादा शुगर, नमक या फैट वाले उत्पादों के पैकेट के सामने लाल हेक्सागन में HIGH SUGAR, HIGH SALT या HIGH FAT लिखा जा सकता है। हालांकि, लेबल कब से अनिवार्य होगा और किन पोषक तत्वों को इसकी सीमा में रखा जाएगा, इसे लेकर कई सवाल अभी भी चर्चा में हैं।
रेड हेक्सागन में क्या लिखा होगा?
FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक पैकेट के सामने ऊपरी हिस्से में सफेद बॉक्स के भीतर लाल रंग का हेक्सागन होगा। इसमें उस पोषक तत्व का उल्लेख किया जाएगा जिसकी मात्रा तय सीमा से ज्यादा है। एक ही उत्पाद में एक से ज्यादा पोषक तत्व तय सीमा से ऊपर होने पर उसी हेक्सागन में संबंधित चेतावनियां दी जा सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 सितंबर को FSSAI से इस लेबल की डिजाइन, आकार, रंग, जगह, पोषक तत्वों की सीमा, लागू होने की समयसीमा और उपभोक्ताओं की समझ से जुड़े 13 सवाल पूछे थे। कोर्ट ने कहा था कि लेबलिंग व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
कौन सी शुगर और फैट गिनी जाएगी?
यह सबसे अहम सवालों में से एक है। FSSAI के ताजा जवाब के मुताबिक चेतावनी के लिए Added Sugar और Added Fat को आधार बनाया जाएगा। सैचुरेटेड फैट को अलग से फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी में शामिल नहीं करने की वजह FSSAI ने ICMR-NIN की 2024 डाइटरी गाइडलाइंस में प्रति 100 ग्राम के आधार पर इसकी सीमा नहीं होने को बताया है।
ट्रांस फैट को भी अलग चेतावनी में शामिल नहीं किया जाएगा। FSSAI का कहना है कि औद्योगिक ट्रांस फैट के लिए मौजूदा नियमों में पहले से सीमा तय है।
यहीं एक सवाल और उठता है कि पैकेज्ड उत्पाद में कंपनी के घोषित Added Sugar या Added Fat की जांच किस तरह होगी। खासकर ऐसे उत्पादों में जहां प्राकृतिक और अतिरिक्त पोषक तत्वों को अलग-अलग निर्धारित करना मुश्किल हो सकता है।
लेबल कब से दिखेगा?
FSSAI के जवाब के मुताबिक नियमों को अंतिम रूप देने में करीब चार महीने लग सकते हैं। इसमें आम लोगों और WTO से टिप्पणियां लेने के लिए 60 दिन का समय शामिल होगा। इसके बाद कंपनियों को बदलाव के लिए 365 दिन की अवधि देने का प्रस्ताव है।
FSSAI की मौजूदा नीति के तहत लेबलिंग में बदलाव सामान्य तौर पर 1 जुलाई से प्रभावी होते हैं। इस गणना के आधार पर चेतावनी लेबल के अनिवार्य रूप से लागू होने का सबसे शुरुआती समय जुलाई 2028 बताया जा रहा है। हालांकि, हलफनामे में कोई निश्चित अंतिम तारीख नहीं दी गई है।
कंपनियों को यह अतिरिक्त समय देने के पीछे पहले से छप चुकी पैकेजिंग सामग्री को बेकार होने से बचाने का तर्क दिया गया है।
जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड में अंतर नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या खाद्य पदार्थ कितना प्रोसेस्ड है, इसे चेतावनी लेबल तय करते समय ध्यान में रखा जाएगा।
FSSAI ने इसका जवाब नहीं में दिया है। एजेंसी के अनुसार प्रोसेसिंग और पोषण दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं। इसलिए लेबल के लिए मुख्य आधार शुगर, नमक और फैट की मात्रा होगी।
इसका मतलब यह है कि किसी खाद्य पदार्थ के अल्ट्रा-प्रोसेस्ड होने के आधार पर अलग चेतावनी का प्रावधान प्रस्तावित नहीं है।
अंग्रेजी या हिंदी में होगा लेबल
लेबल पर चेतावनी टेक्स्ट के रूप में होगी और FSSAI ने इसे मौजूदा नियमों के मुताबिक अंग्रेजी या हिंदी में रखने की बात कही है। प्रत्येक पोषक तत्व के लिए अलग-अलग तस्वीर या प्रतीक इस्तेमाल करने का प्रस्ताव नहीं है।
FSSAI का तर्क है कि केवल पिक्टोग्राम पोषण संबंधी समझ की कमी को दूर नहीं कर सकते और अलग-अलग प्रतीकों से भ्रम की स्थिति बन सकती है। इसलिए एक संयुक्त हेक्सागन में संबंधित पोषक तत्वों की जानकारी देने का प्रस्ताव है।
सुप्रीम कोर्ट ने लेबल के आकार और पैकेट के फ्रंट पर उसके अनुपात को लेकर भी सवाल किया था। कोर्ट ने पूछा था कि क्या इसका आकार पैकेट के कुल क्षेत्रफल के हिसाब से तय किया जाएगा और हेक्सागन की स्थिति व फॉन्ट साइज क्या होगी।
स्कूलों में न्यूट्रिशन लिटरेसी की तैयारी
बच्चों को पैकेज्ड फूड के लेबल पढ़ने और पोषण संबंधी जानकारी समझने के सवाल पर FSSAI ने बताया कि उसने शिक्षा मंत्रालय और CBSE अध्यक्ष को पत्र भेजकर पाठ्यक्रम में Nutrition Literacy से जुड़ा अध्याय शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।
इसमें बच्चों को खाद्य पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी और फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी समझने की जानकारी देने की बात है। FSSAI स्कूलों को अपने ‘Eat Right School’ सर्टिफिकेशन की ओर प्रोत्साहित करने की भी बात कह रहा है।
हालांकि, अभी यह पाठ्यक्रम अध्याय प्रस्ताव के स्तर पर ही है।
मीठे पेय और एडिटिव्स पर भी जवाब
पेय पदार्थों के लिए हेक्सागन में ड्रिंक कैटेगरी का उल्लेख करने का प्रस्ताव है। अलग से पेय पदार्थों के लिए कोई नई सीमा तय किए जाने की बात सामने नहीं आई है।
कंपनियां शुगर की जगह कृत्रिम मिठास या दूसरे एडिटिव्स का ज्यादा इस्तेमाल न करने लगें, इस सवाल पर FSSAI ने मौजूदा एडिटिव नियमों को पर्याप्त बताया है। कृत्रिम मिठास वाले उत्पादों पर इसकी जानकारी फ्रंट पर देने का प्रावधान बताया गया है।
लाल रंग को लेकर भी सवाल उठा था कि कहीं इसे नॉन-वेज प्रतीक से भ्रमित तो नहीं किया जाएगा। FSSAI ने कहा कि नॉन-वेज लोगो भूरे रंग का और अलग आकार का है, इसलिए दोनों में भ्रम की संभावना नहीं है।
दो चरणों की जगह सिंगल फेज का प्रस्ताव
FSSAI के पहले प्रस्ताव में चेतावनी लेबल को दो चरणों में लागू करने की बात थी। शुरुआती चरण में दो या उससे अधिक पोषक तत्व तय सीमा से ज्यादा होने पर लेबल और दूसरे चरण में किसी एक पोषक तत्व की मात्रा ज्यादा होने पर चेतावनी देने का प्रस्ताव था।
ताजा जवाब में FSSAI ने इस दो-चरणीय व्यवस्था से हटकर सिंगल-फेज व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है, जिसमें किसी एक पोषक तत्व की मात्रा तय सीमा से ज्यादा होने पर भी चेतावनी लेबल लगाया जा सकेगा। हालांकि, इस बदलाव के पीछे विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने अब क्या?
FSSAI ने रेड हेक्सागन वाली व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है, लेकिन लेबल की अंतिम डिजाइन, आकार, पोषक तत्वों की गणना और लागू होने की समयसीमा जैसे मुद्दों पर अदालत को आगे विचार करना है।
एक और सवाल यह है कि जिन सीमाओं के आधार पर चेतावनी तय होगी, उन्हें मंजूरी देने वाली Food Authority की पूरी निर्णय प्रक्रिया और रिकॉर्ड हलफनामे में कितना स्पष्ट है।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 सितंबर को FSSAI से इन सभी पहलुओं पर जवाब मांगा था और 28 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई तय की थी। अब अदालत यह देखेगी कि नियामक की ओर से दाखिल जवाब उसके उठाए गए सवालों को पर्याप्त रूप से स्पष्ट करते हैं या नहीं।
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