नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू (Markandey Katju) ने छात्र संगठन AISA की नेता नेहा बोरा के ब्राह्मणों और मंदिरों के पुजारियों को लेकर दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। काटजू ने आरोप लगाया कि नेहा बोरा को यह भ्रम हो गया है कि वह अधूरी जानकारी के आधार पर हर विषय पर लोगों को उपदेश दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि बोरा जाति व्यवस्था पर सवाल उठातीं तो उन्हें इसका समर्थन होता, लेकिन ‘ब्राह्मणवाद’ शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं है।
मार्कंडेय काटजू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने एक लेख की तस्वीर साझा की है। लेख का शीर्षक ‘ब्राह्मणवाद पर नेहा बोरा का हमला’ है। इसमें उन्होंने नेहा बोरा के हालिया भाषण और उसमें ब्राह्मणों तथा पुजारियों को लेकर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है।
अपने लेख में काटजू ने लिखा कि सार्वजनिक जीवन में नई पहचान बनाने वाली नेहा बोरा ने हाल ही में एक भाषण में ब्राह्मणवाद पर हमला किया और ब्राह्मण पुजारियों पर मंदिरों में दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने के बाद बोरा को ऐसा लगने लगा है कि वह अधूरी जानकारी के बावजूद दुनिया के हर विषय पर लोगों को उपदेश दे सकती हैं।
काटजू ने कहा कि यदि नेहा बोरा ने अपने भाषण में जाति व्यवस्था की आलोचना की होती तो वह उनका समर्थन करते। लेकिन ‘ब्राह्मणवाद’ शब्द के इस्तेमाल से यह संदेश जाता है कि सभी ब्राह्मण अत्याचारी और बुरे हैं। उन्होंने इस शब्द के प्रयोग को अनुचित बताते हुए अपने पूर्व लेखों का भी उल्लेख किया।
जाति व्यवस्था पर भी रखी अपनी राय
काटजू ने अपने लेख में जाति व्यवस्था के ऐतिहासिक स्वरूप पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि समय के साथ जाति व्यवस्था समाज में पेशागत विभाजन का रूप लेती गई। सैद्धांतिक रूप से चार वर्णों की व्यवस्था बताई गई थी, लेकिन व्यवहार में सैकड़ों जातियां अस्तित्व में आ गईं।
उन्होंने इस संदर्भ में ब्रिटेन के कई उपनामों का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, बेकर, बुचर, टेलर, गार्डनर, स्मिथ, गोल्डस्मिथ, मेसन और पॉटर जैसे उपनाम उनके पूर्वजों के पेशों से जुड़े रहे हैं।
काटजू ने यह भी तर्क दिया कि सामंती दौर में जाति व्यवस्था ने पेशागत श्रम विभाजन के अनुरूप काम किया था। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान समय में जाति व्यवस्था भारतीय समाज के लिए नुकसानदेह है।
नेहा बोरा ने क्या दिया था बयान?
दरअसल, इसी महीने की शुरुआत में नेहा बोरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें वह ब्राह्मणवादी व्यवस्था और मंदिरों में पुजारियों की भूमिका को लेकर टिप्पणी करती दिखाई दी थीं। उन्होंने अपने भाषण में महिलाओं और वंचित वर्गों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए ब्राह्मणवादी व्यवस्था की आलोचना की थी।
बोरा ने आरोप लगाया था कि इसी व्यवस्था के कारण महिलाएं असुरक्षित हैं और मंदिरों में पुजारियों द्वारा दुष्कर्म जैसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने उन्नाव और कठुआ की घटनाओं का भी उल्लेख किया था।
इस बयान के बाद दिल्ली की अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने नेहा बोरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। भाजपा नेताओं ने भी उनके बयान की आलोचना की थी। इस पूरे विवाद के बाद नेहा बोरा की टिप्पणी और मार्कंडेय काटजू की प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
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