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संकट में सोना बना ढाल: 1991 में भारत ने 67,000 किलो गोल्ड गिरवी रखकर बचाई थी अर्थव्यवस्था

May 12, 2026

 

नई दिल्ली(New Delhi)। भारत की आर्थिक यात्रा(India’s economic journey) में 1991 का साल सबसे कठिन दौरों(most difficult phases) में से एक माना जाता है। उस समय देश(the country) गंभीर आर्थिक संकट(severe economic crisis) से गुजर रहा था और विदेशी मुद्रा (foreign exchange)भंडार तेजी से खत्म हो रहा था। हालात इतने(The situation) खराब हो गए थे कि देश के पास सिर्फ कुछ दिनों के आयात के लिए ही पैसा(enough funds) बचा था।

संकट की असली वजह क्या थी?
उस दौर में भारत की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से घिरी हुई थी।लाइसेंस-परमिट राज के कारण उद्योगों पर सख्त नियंत्रण लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा,खाड़ी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल सोवियत संघ के टूटने से निर्यात को बड़ा झटका इन सभी कारणों ने मिलकर देश की आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया था।

कब और क्यों गिरवी रखा गया सोना?
1991 के आर्थिक संकट के दौरान भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया।देश के पास विदेशी मुद्रा लगभग खत्म हो चुकी थीअंतरराष्ट्रीय भुगतान करना मुश्किल हो गया था। डिफॉल्ट की स्थिति बनने का खतरा थाऐसे में भारत ने अपने सोने को गिरवी रखकर विदेशी कर्ज लिया।

कितना सोना गिरवी रखा गया?
रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय लगभग 47 टन सोना विदेश भेजा गया (बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के पास)करीब 20 टन सोना स्विट्जरलैंड में गिरवी रखा गया। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 67 टन सोना उस संकट से निपटने के लिए इस्तेमाल किया गया।

किसने संभाली जिम्मेदारी?
उस समय की आर्थिक टीम ने मिलकर यह कठिन फैसला लिया, जिसमें शामिल थे।
प्रधानमंत्री चंद्रशेखर (तत्कालीन सरकार)
अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह
वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा
भारतीय रिजर्व बैंक  (RBI) के वरिष्ठ अधिकारी यह फैसला देश की अर्थव्यवस्था को डिफॉल्ट होने से बचाने के लिए लिया गया था।


  • कैसे भेजा गया सोना?
    सोना बेहद गोपनीय तरीके से देश से बाहर भेजा गया। मुंबई एयरपोर्ट से विशेष सुरक्षा में सोना ले जाया गया अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बैंकों में इसे गिरवी रखा गया।इसके बदले भारत को तत्काल विदेशी मुद्रा सहायता मिली

    क्या था इसका असर?
    इस फैसले के बाद भारत ने तत्काल आर्थिक संकट से राहत पाई। अंतरराष्ट्रीय भरोसा दोबारा हासिल किया। और बाद में 1991 के आर्थिक सुधारों की शुरुआत हुई। यही सुधार आगे चलकर भारत की आर्थिक उदारीकरण की नींव बने।1991 का सोना गिरवी संकट भारत के इतिहास में एक बड़ा मोड़ था। यह वह समय था जब देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भारत को अपने “सोने” का सहारा लेना पड़ा। आज भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन यह घटना याद दिलाती है कि आर्थिक स्थिरता कितनी महत्वपूर्ण होती है।

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