
अगरतला। त्रिपुरा (Tripura) से दुबई (Dubai) के लिए 1 मिट्रिक टन सरसों शहद (Mustard Honey) की पहली खेप का निर्यात (Export) किया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक इससे लोकल मधुमक्खी पालकों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार (New International market) के मौके खुलेंगे। मंत्रालय के तहत आने वाले कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने त्रिपुरा के डेरगांग किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) द्वारा 1 मीट्रिक टन सरसों के शहद की दुबई को पहली बार निर्यात की सुविधा प्रदान की। यह निर्यात एफपीओ और क्षेत्र के लिए एक नई उपलब्धि है, क्योंकि इससे स्थानीय मधुमक्खी पालकों और किसानों के लिए संगठित निर्यात-उन्मुख उत्पादन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर सृजित हुआ है।
सरकार के मुताबिक यह खेप इस क्षेत्र से सरसों के शहद का पहली बार निर्यात है और इससे त्रिपुरा की शहद मूल्य श्रृंखला में विविधीकरण के नए अवसर खुलेंगे। इस पहल से स्थानीय किसानों और एफपीओ को निर्यात के अवसर तलाशने तथा अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजारों में अपनी भागीदारी मजबूत करने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्रालय ने आगे कहा कि सरसों के शहद का यह निर्यात किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में एफपीओ के नेतृत्व में उत्पादों के एकत्रीकरण और उद्योग सहयोग की क्षमता को प्रदर्शित करता है। इससे त्रिपुरा और व्यापक पूर्वोत्तर क्षेत्र के अधिक एफपीओ और किसानों को मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता सुधार तथा निर्यात के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच अब 15 देशों से एलएनजी आयात कर रहा भारत
ईरान अमेरिका के बीच पांच महीने से जारी टकराव के कारण पश्चिम एशिया में संकट गहरा हो चुका है। इस कारण आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों से अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात के स्रोतों को पहले के छह देशों से बढ़ाकर कुल 15 देशों तक कर दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी के मुताबिक देश ने कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों का नेटवर्क भी व्यापक किया है। अब 27 देशों की तुलना में 41 देशों से कच्चे तेल का आयात किया जा रहा है। उन्होंने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा, इस विविधीकरण से किसी एक देश, क्षेत्र या पारगमन मार्ग पर निर्भरता कम हुई है और आपूर्ति में व्यवधान तथा बाजार में उतार-चढ़ाव से निपटने की भारत की क्षमता बढ़ी है। कच्चे तेल, एलएनजी और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता के अनुसार कदम उठाए जाते हैं।
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