
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई हो रही है। जस्टिस सुब्रहमण्यम प्रसाद की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। नेहा बोरा की ओर से याचिका में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट गोपाल शंकर नारायण पैरवी कर रहे हैं, जबकि दिल्ली पुलिस की ओर से ASG चेतन शर्मा ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाए हैं।
नेहा बोरा के वकील गोपाल शंकर नारायण ने अदालत में कहा कि यह मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत जारी नोटिस से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता AISA की सक्रिय नेता हैं और सरकार की नीतियों में सुधार की मांग करती रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की थी, लेकिन कहीं भी हिंसा के लिए नहीं उकसाया। उनके मुताबिक, नेहा बोरा के प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं।
गोपाल शंकर नारायण ने अदालत को बताया कि 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी। इसके बाद 16 अक्टूबर को शाम चार बजे सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली गई, जिसमें जंतर-मंतर को अचानक डीनोटिफाई किए जाने पर नाराजगी जताई गई थी। पोस्ट में मंडी हाउस में मिलने की बात कही गई थी। नेहा बोरा के वकील ने दलील दी कि इस पोस्ट में हिंसा भड़काने, कानून तोड़ने, शांति भंग करने, सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने या कोई अपराध करने के लिए लोगों को इकट्ठा करने की बात नहीं थी।
गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि 16 अक्टूबर की शाम को जब नेहा बोरा ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया और मंडी हाउस इलाके में पहुंचीं, तो उन्हें 10-15 मिनट के भीतर ही हिरासत में ले लिया गया। वकील के मुताबिक, उस समय नेहा बोरा ने कोई अपराध नहीं किया था। उन्होंने केवल कुछ नारे लगाए थे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।नेहा बोरा के वकील ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गैर-कानूनी हिरासत बताया। उन्होंने कहा कि रात में नेहा बोरा को आर.के. पुरम थाने ले जाया गया और सुबह तक किसी को यह जानकारी नहीं थी कि उन्हें कहां रखा गया है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved