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पेरू में ‘हिटलर मुसोलिनी’ ने जीता मेयर का चुनाव, 229 वोट पाकर बने विजेता, नाम की वजह से दुनिया भर में चर्चा

October 11, 2026

नई दिल्ली। जर्मनी (Germany) के एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) और इटली (Italy) के बेनिटो मुसोलिनी (Benito Mussolini) के नाम इतिहास में तानाशाही और दमनकारी शासन के लिए दर्ज हैं। ऐसे में जब इन दोनों नामों को मिलाकर बने नाम वाला कोई नेता चुनाव जीत जाए, तो चर्चा होना स्वाभाविक है। दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में 45 वर्षीय हिटलर मुसोलिनी सिमेओन फ्लोरेस ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत दर्ज की है। उनके नाम ने एक छोटे से जिले के चुनाव को अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है।

फ्लोरेस ने पेरू के हुआनुको विभाग के पहाड़ी इलाके में स्थित क्वेरोपाल्का जिले के मेयर का चुनाव जीता है। उन्होंने केंद्रीय-वामपंथी पार्टी ‘आहोरा नासियोन’ के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उन्हें कुल 663 वैध मतों में से 229 वोट मिले, जो 34.5 प्रतिशत हैं। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी गैस्पर बेनिल्डे ओसोरियो ज़ाम्ब्रानो को 25 वोटों से हराया। ओसोरियो दक्षिणपंथी पार्टी ‘पॉपुलर रिन्यूअल पेरू’ के उम्मीदवार थे और उन्हें 204 वोट मिले।

730 से कुछ अधिक आबादी वाला जिला, फिर भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा
क्वेरोपाल्का पेरू के लौरिकोचा प्रांत में स्थित एक छोटा-सा जिला है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में यहां की आबादी 730 से कुछ अधिक थी। यह क्षेत्र राजधानी लीमा से लगभग 360 किलोमीटर दूर स्थित है।

आमतौर पर इतने छोटे जिले में हुए स्थानीय चुनाव की चर्चा स्थानीय स्तर तक ही सीमित रहती, लेकिन फ्लोरेस के नाम ने इसे दुनिया भर में चर्चा का विषय बना दिया। उनके नाम में शामिल ‘हिटलर’ और ‘मुसोलिनी’ 20वीं सदी के यूरोपीय इतिहास के दो कुख्यात तानाशाहों की याद दिलाते हैं।


  • जर्मनी के एडोल्फ हिटलर नाजी शासन का प्रमुख था, जबकि इटली में बेनिटो मुसोलिनी फासीवादी शासन का नेतृत्व करता था। दोनों के शासनकाल दमन और हिंसा के लिए जाने जाते हैं। यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि फ्लोरेस के नाम को लेकर लोगों की दिलचस्पी की प्रमुख वजह बनी है।

    पेरू में पहले भी ‘हिटलर’ नाम वाला नेता जीत चुका है चुनाव
    पेरू में किसी नेता के नाम में ‘हिटलर’ होने की वजह से चर्चा होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले हिटलर ग्यूस्कलिन अल्बा सांचेज भी अपने नाम को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ चुके हैं। वह केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टी ‘वी आर पेरू’ से जुड़े थे और 2011 से 2014 तक युंगार शहर के मेयर रहे थे।

    अल्बा ने वर्ष 2018 में भी मेयर का चुनाव जीता था। हालांकि, उस चुनाव के दौरान उनके प्रतिद्वंद्वी लेनिन व्लादिमीर रोड्रिगेज वाल्वरडे ने उनकी उम्मीदवारी की वैधता को चुनौती दी थी।

    रिपोर्टों के अनुसार, अल्बा ने अपने चुनाव प्रचार में ‘हिटलर रिटर्न्स’ और ‘हिटलर विद द पीपल’ जैसे नारों का इस्तेमाल भी किया था। उन्होंने खुद को ‘अच्छा हिटलर’ बताया था। अल्बा का कहना था कि उनके पिता ने उनका नाम रखते समय नाजी नेता के इतिहास और उसकी विरासत के बारे में जानकारी नहीं रखी थी।

    हिटलर सावेद्रा भी रहे थे चर्चा में
    पेरू के एक अन्य नेता हिटलर सावेद्रा भी अपने नाम के कारण सुर्खियों में रहे थे। पेशे से सर्जन सावेद्रा ‘वी आर पेरू’ पार्टी से सांसद बने थे। उन्होंने 2021 से 2024 में अपनी मृत्यु तक संसद में काम किया। उनका निधन 46 वर्ष की उम्र में हुआ था।

    पेरू में एक के बाद एक ऐसे नाम वाले नेताओं के चुनाव जीतने या राजनीति में सक्रिय रहने के मामले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचते रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के नाम का ऐतिहासिक शख्सियतों से मेल खाना अपने आप में उसकी विचारधारा या राजनीतिक सोच का प्रमाण नहीं है। फ्लोरेस की जीत की चर्चा फिलहाल मुख्य रूप से उनके असामान्य नाम और चुनावी नतीजों को लेकर हो रही है।

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