
नई दिल्ली। रंग, उमंग और स्वाद से(The festival of Holi, filled with color) भरी होली का त्योहार खुशियां लेकर आता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही(little carelessness) इस जश्न को बीमारी में बदल(this celebration into illness) सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए (Safdarjung Hospital) के वरिष्ठ जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ(public health expert) डॉ. जुगल किशोर ने सुरक्षित और स्वस्थ(safe and healthy Holi) होली मनाने के लिए जरूरी सुझाव दिए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में मिलने वाले कई रंग हानिकारक रसायनों जैसे लेड और कॉपर सल्फेट से बने होते हैं, जो त्वचा, आंखों और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या एलर्जी से पीड़ित लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना या गंदे पानी से होली खेलना स्किन इन्फेक्शन, फंगल इंफेक्शन और डायरिया जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
खानपान में भी सतर्कता जरूरी है। कृत्रिम फूड डाई से बनी मिठाइयां, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकते हैं। कब्ज, गैस, पेट दर्द और एलर्जी की शिकायत बढ़ सकती है। बेहतर है कि प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें—लाल रंग के लिए चुकंदर, पीले के लिए हल्दी, हरे के लिए पालक और गुलाबी रंग के लिए गुलाबी गाजर का इस्तेमाल सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
रंग खेलने से पहले त्वचा पर नारियल या बादाम तेल की परत लगाएं ताकि रंग सीधे त्वचा में न समाए। सनस्क्रीन का प्रयोग भी जरूरी है, क्योंकि धूप और रसायन मिलकर त्वचा को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। आंखों में रंग जाने पर उन्हें रगड़ें नहीं, ठंडे पानी से धोएं और जरूरत पड़े तो डॉक्टर से संपर्क करें।
होली पर नशे का चलन भी आम है, लेकिन अल्कोहल और भांग का अधिक सेवन दिमाग और शरीर दोनों पर बुरा असर डाल सकता है। मधुमेह या हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को मिठाइयों और तले भोजन से परहेज रखना चाहिए।संदेश साफ हैहोली जरूर खेलें, लेकिन समझदारी और सावधानी के साथ। सही तरीका अपनाएं तो त्योहार का आनंद दोगुना होगा, वरना छोटी सी लापरवाही बड़ी परेशानी बन सकती है।
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