तेहरान। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव के बीच यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) ने दक्षिणी सऊदी अरब में ड्रोन हमले करने का दावा किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी (Yahya Sari) के मुताबिक, इन हमलों में नजरान एयरपोर्ट और सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको से जुड़ी एक सुविधा को निशाना बनाया गया। हालांकि, सऊदी अधिकारियों की ओर से इन दावों की तत्काल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि संगठन ने ड्रोन के जरिए सऊदी अरब में दो हमले किए। उन्होंने नजरान एयरपोर्ट को सऊदी अरब का एक संवेदनशील सैन्य ठिकाना बताया। इसके अलावा यमन सीमा के पास नजरान में स्थित अरामको की एक सुविधा को भी निशाना बनाने का दावा किया गया।
हालांकि, इन हमलों में किसी तरह के नुकसान या जान-माल के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सऊदी अधिकारियों की तरफ से भी हूतियों के दावे की तत्काल पुष्टि नहीं की गई।
हूतियों के ये दावे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की चेतावनी के कुछ घंटे बाद सामने आए। आईआरजीसी ने चेताया था कि यदि हूती अपने हमलों का दायरा बढ़ाते हैं तो सऊदी अरब के लिए उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में हूतियों के ताजा हमले को क्षेत्रीय तनाव के और बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। यमन का संघर्ष पहले से ही पश्चिम एशिया के व्यापक संकट से जुड़ा हुआ है।
यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ हूतियों और सऊदी अरब के बीच फिर से टकराव तेज हुआ है। हूतियों पर सऊदी अरब से जुड़े जहाजों, एयरपोर्ट और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं।
हालिया घटनाक्रम के बाद सऊदी अरब की सुरक्षा और महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अगर ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी रहता है, तो इससे पूरे क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है।
हूतियों की गतिविधियों से लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन को प्रभावित कर सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, हूती नियंत्रित इलाकों से दक्षिण की ओर अपना प्रभाव बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सुरक्षा संबंधी जोखिम और बढ़ सकते हैं।
सऊदी अरब में कथित ड्रोन हमले ऐसे समय हुए हैं जब ईरान, हूती और क्षेत्र के अन्य पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान की चेतावनी और उसके कुछ ही घंटों बाद हूतियों की ओर से हमले का दावा इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय संघर्ष का दायरा और व्यापक हो सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन हमलों की वास्तविकता और नुकसान कितना हुआ है और सऊदी अरब इन घटनाओं का क्या जवाब देता है। आने वाले दिनों में इसका असर यमन संघर्ष के साथ-साथ लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
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