कोझिकोड । केरल (Keral) में सब कुछ ठीक नहीं है। कांग्रेस की तमाम कोशिशों के बावजूद वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor ) पार्टी के लिए नई मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। पार्टी जहां सरकार पर संविधान के ऊपर हमला करने का आरोप लगा रही है, वहीं थरूर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान को पवित्र मानते हैं। इसके साथ उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र करते हुए केंद्र सरकार के रुख की वकालत की है।
शशि थरूर की पार्टी से नाराजगी कोई नई बात नहीं है। केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता वाली बैठक से भी थरूर दूर रहे थे। उस वक्त पार्टी ने दलील दी थी कि केरल लिटरेचर फेस्टिवल में शशि थरूर की दो किताबों का विमोचन है, इसलिए वह शामिल नहीं हुए। पर, केरल के कोझिकोड में हुए इस फेस्टिवल में उनके बयान से विवाद बढ़ गया है।
केरल में कुछ माह बाद विधानसभा चुनाव हैं। पार्टी पिछले 10 वर्षों से सत्ता से बाहर है। पार्टी की स्थानीय निकाय चुनाव में अच्छे प्रदर्शन से भी उम्मीद जगी है। पर, थरूर के बयानों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। तिरुवनंतपुरम से थरूर लगातार चार बार लोकसभा चुनाव जीते हैं, पर निगम चुनाव में इस सीट से भाजपा ने जीत हासिल की है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी एलडीएफ का प्रदर्शन बेहतर था।
ऐसे में तिरुवनंतपुरम क्षेत्र की 14 विधानसभा सीट को लेकर पार्टी रणनीतिकारों की धड़कनें बढ़ रही हैं। कांग्रेस नेता मानते हैं कि इन सीटों पर बेहतर प्रदर्शन के लिए शशि थरूर को जिम्मेदारी संभालनी होगी। इसलिए, संसद के बजट सत्र में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी थरूर से सीधा मुलाकात कर सकते हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद भी काफी दिनों से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बात करने की मांग करते रहे हैं।
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