
नई दिल्ली। सोने-चांदी (Gold and silver) की कीमतों पर अमेरिका (America) से आए मजबूत महंगाई आंकड़ों का असर दिखाई दे रहा है। घरेलू कमोडिटी मार्केट में लगातार दूसरे दिन दोनों कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को एमसीएक्स (MCX) पर चांदी करीब ₹2,600 टूटकर ₹2,30,270 प्रति किलो पर आ गई, जबकि सोने का भाव करीब ₹1,200 गिरकर ₹1,50,695 प्रति 10 ग्राम रह गया। इससे पहले गुरुवार को भी सोना-चांदी तेज गिरावट के साथ बंद हुए थे।
दो दिन में चांदी ₹12,600 से ज्यादा लुढ़की
एमसीएक्स पर गुरुवार को चांदी की कीमत में ₹10,000 से ज्यादा की गिरावट आई थी। इसके बाद शुक्रवार की गिरावट को मिलाकर दो कारोबारी दिनों में चांदी ₹12,600 से ज्यादा सस्ती हो चुकी है। इसी अवधि में सोने का भाव भी ₹2,000 से अधिक नीचे आ गया है।
कीमती धातुओं में यह कमजोरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट के बाद घरेलू बाजार तक पहुंची है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी महंगाई और फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर है।
ग्लोबल मार्केट में भी सोना-चांदी कमजोर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी शुक्रवार को दोनों धातुओं पर दबाव रहा। ग्लोबल मार्केट में सोना 1.32% गिरकर 4,401.74 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी 5.45% की गिरावट के साथ 64.908 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
अमेरिकी महंगाई ने बढ़ाई ब्याज दर बढ़ने की चिंता
सोने-चांदी में गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका से आए महंगाई के मजबूत आंकड़े माने जा रहे हैं। महंगाई के आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। कॉपी के मुताबिक, रेट बढ़ोतरी की संभावना करीब 80% तक पहुंच गई है।
ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद से डॉलर मजबूत होता है और आमतौर पर सोने-चांदी जैसी गैर-ब्याज वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ता है। यही वजह है कि दोनों कीमती धातुओं में तेज बिकवाली देखने को मिल रही है।
कच्चे तेल की तेजी से डॉलर को भी सहारा
सोने-चांदी में गिरावट की एक वजह मुनाफावसूली भी मानी जा रही है। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। Brent Crude Oil बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। तेल की कीमतों में तेजी के बीच डॉलर की मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
सोने और चांदी में लगातार दो दिन की तेज गिरावट के बाद निवेशकों के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। ऐसे में किसी भी तरह का निवेश करने से पहले बाजार की स्थिति और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है।
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