
नई दिल्ली। हरतालिका तीज (Hartalika Teej) का व्रत हिंदू धर्म (Hindu Religion) में विशेष महत्व रखता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास कर भगवान शिव और माता पार्वती (Lord Shiva and Maa Parvati) की विधि-विधान से पूजा करती हैं। इस बार हरतालिका तीज 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी।
मान्यता है कि हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस बार पर्व पर चित्रा नक्षत्र और ब्रह्म योग का संयोग बनने की बात कही जा रही है। साथ ही गणेश चतुर्थी का संयोग भी बताया गया है। ऐसे में शिव-पार्वती के साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व माना जा रहा है।
14 सितंबर को ही रखा जाएगा व्रत
हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त: 14 सितंबर को सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा।
तीज पर बनेंगे शुभ संयोग
इस बार हरतालिका तीज के दिन चित्रा नक्षत्र और ब्रह्म योग का संयोग बनने की बात कही जा रही है। इसके अलावा इसी दिन गणेश चतुर्थी का संयोग भी बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त हो सकता है। भगवान गणेश की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
ऐसे करें हरतालिका तीज की पूजा
व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर चौकी स्थापित करें और उस पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं। मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाकर चौकी पर स्थापित करें।
पूजा की शुरुआत भगवान गणेश से करें। उन्हें तिलक लगाकर दूर्वा अर्पित करें और विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाएं। शिव-पार्वती को वस्त्र, फल, मिष्ठान और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करने के बाद हरतालिका तीज व्रत की कथा का पाठ या श्रवण करें।
पूजा के अंत में पहले भगवान गणेश की आरती करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार शाम के समय भी शिव-पार्वती की पूजा और आरती करना शुभ माना जाता है।
शिव-पार्वती के मिलन से जुड़ा है पर्व
हरतालिका तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी मान्यता के चलते विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना से हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखती हैं।
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