बीजिंग। वैश्विक स्तर (Global level) पर भारतीयों की मेहनत और कौशल का असर एक बार फिर दिखा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़ी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों में काम कर रहे भारतीयों ने अपने देश को रिकॉर्ड स्तर पर पैसा भेजकर नया इतिहास रच दिया है।
इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन की ‘वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, साल 2024 में भारत को करीब 137 बिलियन डॉलर (लगभग 11.4 लाख करोड़ रुपये) का रेमिटेंस मिला। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और भारत लगातार एक दशक से इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।
100 बिलियन डॉलर पार करने वाला इकलौता देश
रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का पहला और इकलौता देश बन गया है जिसने रेमिटेंस में 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया है। इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर भारतीयों की आर्थिक भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।
लगातार बढ़ता ग्राफ
अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2010 में भारत को करीब 53.48 बिलियन डॉलर, 2015 में 68.91 बिलियन डॉलर और 2020 में 83.15 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस मिला था। पिछले चार वर्षों में इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है।
किन देशों से आता है ज्यादा पैसा?
रेमिटेंस भेजने वाले देशों में अमेरिका सबसे आगे है, जहां से 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसके अलावा सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं।
छात्रों की भी मजबूत मौजूदगी
आर्थिक योगदान के साथ-साथ भारतीय छात्र भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है। 2022 तक 6.20 लाख से अधिक भारतीय छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा ले रहे थे।
रेमिटेंस के क्षेत्र में भारत की यह उपलब्धि न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि दुनियाभर में भारतीयों की भूमिका कितनी अहम हो चुकी है। लगातार बढ़ता यह आंकड़ा आने वाले समय में भारत की आर्थिक ताकत को और मजबूत कर सकता है।
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