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भारत-बांग्लादेश सीमा पर प्रस्तावित अस्पताल पर सेना ने जताई सुरक्षा आपत्ति, सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला

January 15, 2026

नई दिल्‍ली । असम (Assam) के जोरहाट (Jorhat) में संवेदनशील भारत-बांग्लादेश सीमा (India-Bangladesh border) के पास एक सैन्य शिविर (military camp) के सामने प्रस्तावित मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल (Multi-specialty hospital) का मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है। सेना ने आपत्ति जताते हुए इसका इस्तेमाल ड्रोन परिचालन और लंबी दूरी की स्नाइपर राइफल के लिए होने की आशंका जताई है। सेना ने शुरुआत में जोरहाट विकास प्राधिकरण द्वारा निजी कंपनी को अस्पताल के निर्माण के लिए दिए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र पर आपत्ति जताई थी। अब उसने कहा है कि यदि अस्पताल के निर्माण की अनुमति दी जाती है, तो इसमें 15 फीट से अधिक ऊंची कंक्रीट की चारदीवारी होनी चाहिए जिसमें विभाजक लगे हों और बहुमंजिला इमारत की कोई भी खिड़की सेना शिविर की ओर नहीं होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी के साथ सेना के अधिकारियों का पक्ष सुना। पीठ ने टिप्पणी की कि संतुलन बनाना आवश्यक है क्योंकि एक तरफ ‘जन स्वास्थ्य’ है और दूसरी तरफ ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ है। शीर्ष अदालत ने एएसजी और अस्पताल का निर्माण कर रही निजी कंपनी डॉ. एन. सहेवाला एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे से दो सप्ताह के भीतर समाधान निकालने को कहा।


  • पीठ ने कहा कि सेना ने कहा है कि वह अस्पताल के निर्माण के खिलाफ नहीं है, क्योंकि आपात स्थिति में यह उसके कर्मियों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है, लेकिन कुछ सुरक्षा उपाय होने चाहिए। बनर्जी ने कहा, ‘‘अस्पताल की चारदीवारी 15 फीट से अधिक ऊंची होनी चाहिए और उसमें एक विभाजक होना चाहिए। अस्पताल की कोई भी खिड़की सेना शिविर की ओर नहीं होनी चाहिए।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘भारत-बांग्लादेश सीमा पर इस समय स्थिति बेहद अस्थिर है। खतरा केवल लंबी दूरी की स्नाइपर राइफल का ही नहीं है, बल्कि शिविर की रेकी के लिए ड्रोन भी तैनात किए जा सकते हैं।’’ शीर्ष अदालत ने सेना के एक कर्नल द्वारा दी गई दलीलों को रिकॉर्ड पर दर्ज करने के बाद कहा कि दोनों पक्षों द्वारा समाधान निकाला जा सकता है क्योंकि ‘जन स्वास्थ्य’ और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।

    पीठ ने आठ जनवरी के अपने आदेश में कहा, “हमने एएसजी विक्रमजीत बनर्जी और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे से कर्नल सौरभ के साथ बैठक करने और जन स्वास्थ्य के अन्य महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज किए बिना राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के तरीकों और साधनों पर विचार करने का अनुरोध किया है। हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित पक्ष मुद्दों के सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने वाली बैठक का विवरण हमारे समक्ष प्रस्तुत करेंगे।”

    न्यायालय ने कहा कि यदि अस्पताल का निर्माण करने वाली कंपनी को कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने के लिए अतिरिक्त व्यय करना पड़ता है, तो केंद्र सरकार उसकी मदद कर सकती है। सुनवाई के दौरान, दवे ने दलील दी कि कंपनी ने जोरहाट नगर पालिका बोर्ड क्षेत्र के अंतर्गत जोरहाट कस्बे में आठ बीघा 17 लेचा जमीन खरीदी है और उसने विकास प्राधिकरण से एनओसी के लिए आवेदन किया था, जो 4 मार्च, 2022 को प्रदान किया गया था, लेकिन सेना की आपत्तियों के बाद इसे बाद में रद्द कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि अस्पताल के निर्माण को लेकर ही आपत्तियां उठाई जा रही हैं, जबकि शिविर के आसपास बाजार समेत अन्य निर्माण भी मौजूद हैं।

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