
मुंबई । आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने कहा कि भारतीय रुपया अंडरवैल्यूड हो सकता है (Indian Rupee could be Undervalued) ।
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि बाजार की धारणा और मुद्रा के बारे में निवेशकों की स्थिति हमेशा किसी मुद्रा के वास्तविक मूल्य को नहीं दर्शाती। उन्होंने कहा, “केवल लंबी अवधि में बाजार किसी मुद्रा का सही मूल्य निर्धारित कर पाते हैं।” यह टिप्पणी उन्होंने रुपए में लगातार कमजोरी की उम्मीदों और मुद्रा हेजिंग गतिविधियों को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में की। आरबीआई गवर्नर के अनुसार, मुद्रा मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई मानक, विशेष रूप से रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (आरईईआर), यह संकेत देते हैं कि भारतीय रुपया अत्यधिक मूल्यांकित नहीं है। मल्होत्रा ने कहा, “कई अनुमानों के अनुसार, जिनमें आरईईआर भी शामिल है, रुपया ओवरवैल्यूड नहीं है, बल्कि संभव है कि यह अंडरवैल्यूड हो।” उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बाजार में यह सवाल उठाया जा रहा था कि भारत की मजबूत पूंजी आकर्षित करने की क्षमता के बावजूद निवेशक रुपए में और कमजोरी की संभावना क्यों देख रहे हैं। कई विश्लेषक हेजिंग पैटर्न और मुद्रा अनुमानों के आधार पर आगे भी रुपए के दबाव में रहने की संभावना जता रहे हैं।
यह बयान आरबीआई की उस मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आया है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर उसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले अगस्त 2026 की नीति समीक्षा केंद्रीय बैंक की लगातार चौथी ऐसी बैठक थी, जिसमें रेपो रेट और नीति रुख दोनों को अपरिवर्तित रखा गया था। जून, अप्रैल और फरवरी 2026 की बैठकों में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। दिसंबर 2025 में आरबीआई ने 25 आधार अंकों की कटौती कर रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत किया था। इसके साथ ही, बुधवार को आरबीआई ने वित्तीय क्षेत्र से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण कदमों की भी घोषणा की। केंद्रीय बैंक ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी अकाउंट एग्रीगेटर (एनबीएफसी-एए) प्रणाली में इंटरऑपरेबिलिटी लागू करने का फैसला किया है।
इस व्यवस्था के तहत किसी भी लाइसेंस प्राप्त अकाउंट एग्रीगेटर ऐप में पंजीकृत ग्राहक अपने वित्तीय डेटा को नेटवर्क पर मौजूद किसी भी विनियमित वित्तीय संस्था के साथ साझा कर सकेंगे, चाहे संबंधित बैंक, ऋणदाता या वेल्थ मैनेजर किसी भी प्लेटफॉर्म का उपयोग करता हो। आरबीआई ने कहा कि इससे डीमैट खाताधारकों को अपने डीमैट होल्डिंग्स और बैंक जमा खातों की जानकारी एक ही स्थान पर कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (सीएएस) के रूप में देखने में सुविधा होगी। केंद्रीय बैंक ने बताया कि इन व्यवस्थाओं को 31 दिसंबर तक लागू किए जाने की योजना है। साथ ही, सेबी विनियमित डिपॉजिटरी संस्थाओं को भी बैंक जमा खातों की जानकारी सीएएस में शामिल करने की सुविधा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
इसके अलावा, आरबीआई ने फाइनेंशियल मार्केट्स के लिए टेक्निकल कंसल्टेटिव कमेटी गठित करने की भी घोषणा की है। यह समिति मुद्रा बाजार, सरकारी प्रतिभूति बाजार, विदेशी मुद्रा बाजार और उनसे जुड़े डेरिवेटिव बाजारों से संबंधित नीतिगत एवं परिचालन विषयों पर बाजार सहभागियों के साथ संरचित संवाद का मंच प्रदान करेगी। केंद्रीय बैंक ने कहा कि समिति की संरचना और कार्यक्षेत्र की अलग से घोषणा की जाएगी। आरबीआई के अनुसार, भारत का अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 3.82 लाख करोड़ रुपए के ऋण वितरण को सुगम बनाने में सहायक रहा। इस अवधि में इसके माध्यम से 3.68 करोड़ ऋण वितरित किए गए और यह मूल्य के आधार पर भारत के खुदरा और एमएसएमई ऋण बाजार का लगभग 8.4 प्रतिशत तथा संख्या के आधार पर 11.8 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है।
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