नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित कनाडा दौरे को लेकर वहां राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के दो सांसदों ने भागवत को कनाडा आने से रोकने और RSS पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इसके विरोध में इंडो-कैनेडियन समुदाय ने मोर्चा खोलते हुए सांसदों की मांग को विभाजनकारी बताया है।
समुदाय की ओर से शुरू किए गए काउंटर-लेटर अभियान में कहा गया है कि पूरे एक सांस्कृतिक संगठन को ‘फासीवादी’ बताकर उसके सदस्यों को कनाडा से बाहर रखने की मांग करना भेदभावपूर्ण रवैया है। अभियान में सांसदों के आरोपों के समर्थन में ठोस और सत्यापित सबूत सामने रखने की मांग भी की गई है।
दरअसल, शुक्रवार को NDP सांसद हीथर मैकफर्सन और जेनी क्वान ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ सार्वजनिक सुरक्षा, विदेश मामलों और आप्रवासन से जुड़े मंत्रियों को पत्र भेजा। इसमें उन्होंने RSS को ‘उग्रवादी संगठन’ बताते हुए मोहन भागवत को कनाडा में प्रवेश देने से रोकने की मांग की।
सांसदों ने भागवत को ‘फासीवादी अर्धसैनिक संगठन का प्रमुख’ बताया और RSS पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग दोहराई। यह मांग इससे पहले NDP के पूर्व नेता जगमीत सिंह के कार्यकाल में भी उठ चुकी है।
मैकफर्सन ने दावा किया कि कई अल्पसंख्यक समुदायों में इस बात को लेकर आशंका है कि भागवत की मौजूदगी से कनाडा में नफरत और हिंसा बढ़ सकती है। वहीं जेनी क्वान ने कनाडा के इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी प्रोटेक्शन एक्ट के प्रावधानों का हवाला देते हुए RSS और उसके सदस्यों को देश में प्रवेश के लिए अवांछित घोषित करने की मांग की।
NDP सांसदों की मांग के बाद इंडो-कैनेडियन समुदाय की ओर से काउंटर-लेटर अभियान शुरू किया गया। इसमें कहा गया कि लाखों लोगों से जुड़े एक सांस्कृतिक संगठन को बिना ठोस प्रमाण के ‘फासीवादी’ बताना खुद भेदभावपूर्ण है।
याचिका में सांसदों के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि किसी संगठन और उसके सदस्यों के खिलाफ इतनी गंभीर कार्रवाई की मांग के लिए कनाडाई कानून के अनुरूप ठोस, सत्यापित और जांचे-परखे सबूत पेश किए जाने चाहिए।
अभियान में यह भी कहा गया कि सांसदों के पत्र में RSS को दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू स्वयंसेवी संगठन बताते हुए उसके सदस्यों को कनाडा से पूरी तरह बाहर रखने की मांग की गई है। समुदाय का तर्क है कि ऐसी भाषा का असर केवल RSS तक सीमित नहीं रह सकता और इससे कनाडा में रहने वाले हिंदू समुदाय के प्रति भी संदेह का माहौल बन सकता है।
2021 की कनाडाई जनगणना के मुताबिक, करीब 8.28 लाख लोगों ने खुद को हिंदू के रूप में पहचाना था। समुदाय का कहना है कि किसी बड़े सांस्कृतिक संगठन के खिलाफ व्यापक आरोपों और प्रतिबंध की मांग से इस पूरी आबादी को अनावश्यक रूप से संदेह के दायरे में लाने का खतरा है।
मोहन भागवत का प्रस्तावित कनाडा दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह उनका कनाडा का पहला दौरा होगा। वर्ष 2005 में तत्कालीन RSS प्रमुख के.एस. सुदर्शन के दौरे के बाद दो दशक से अधिक समय में किसी RSS प्रमुख का यह पहला कनाडा दौरा होगा।
दौरे की तैयारियां अंतिम चरण में बताई जा रही हैं। कार्यक्रम के मुताबिक भागवत के केवल टोरंटो जाने की योजना है। 31 अगस्त को वहां प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम होने की उम्मीद है, जबकि अगले दिन बैठकों का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
कनाडा दौरे के बाद मोहन भागवत के पांच दिवसीय अमेरिका दौरे पर जाने की भी योजना है। उनका अमेरिकी दौरा न्यूयॉर्क में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के साथ समाप्त होने की उम्मीद है।
फिलहाल भागवत के कनाडा दौरे ने वहां राजनीतिक और सामुदायिक बहस को तेज कर दिया है। एक ओर NDP सांसद RSS पर प्रतिबंध और भागवत के प्रवेश पर रोक की मांग कर रहे हैं, वहीं इंडो-कैनेडियन समुदाय इसे विभाजनकारी कदम बताते हुए इसका विरोध कर रहा है। अब नजर इस बात पर है कि कनाडा सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है।
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