
पांच ठेकेदारों को भरोसे में लिया, टेंडर भरकर काम लेने को कहा
इन्दौर। नगर निगम (Municipal council) द्वारा गले की हड्डी बन चुके बीआरटीएस (BRTS) के बस स्टाफ (bus stops) को अलग से टेंडर कर ठेके पर देने की पहल की जा रही है। इसके लिए पांच ठेकेदारों को भरोसे में ले लिया गया है।
निगम ने बीआरटीएस कॉरिडोर की एक तरफ की रैलिंग तो निकलवा दी, लेकिन दूसरे तरफ की रैलिंग और इस पूरे कॉरिडोर में बने हुए 19 बस स्टॉप अभी बचे हैं। इनमें से कॉरिडोर की रैलिंग और उसके नीचे के बीम को तोडऩा तो कोई मुश्किल काम नहीं है, सारी समस्या तो बस स्टॉप को तोडक़र उसके लोहा-लंगर और मलबे को उठाने की है। निगम इस अटाला सामान को अपने पास नहीं रखना चाहता है। निगम ने इस कॉरिडोर को तोडऩे का ठेका जिस एजेंसी को दिया था, वह तो काम छोडक़र भाग गई है। ऐसे में अब इस काम को पूरा कराने के लिए निगम के अधिकारियों द्वारा कसरत की जा रही है। इस कड़ी में निगम के उच्च अधिकारियों द्वारा कल यह फैसला लिया गया है कि अब बस स्टॉप और बची हुई रैलिंग तोडऩे के लिए अलग से टेंडर जारी कर दिया जाए। यह टेंडर जारी करने से पहले निगम के अधिकारियों ने पांच ठेकेदारों को भरोसे में ले लिया है। इन ठेकेदारों को कहा गया है कि टेंडर जारी होने पर आप टेंडर भर दो और हर ठेकेदार चार बस स्टॉप तोडऩे का काम कर दे तो यह काम आसानी से हो जाएगा। सूत्रों ने बताया कि इन ठेकेदारों ने भी इस कार्य को करने पर अपनी सहमति दे दी है। अब एक या दो दिन के अंदर नगर निगम द्वारा इस कार्य के लिए नया टेंडर जारी कर दिया जाएगा। इसी बीच कल से नगर निगम द्वारा इस कॉरिडोर में रोड डिवाइडर बनाने और लाइट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। कल महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा इस कार्य का भूमिपूजन किए जाने के साथ ही अब इस काम को शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
आधे क्षेत्र में ही बनेंगे डिवाइडर
बीआरटीएस का कॉरिडोर कुल 12 किलोमीटर लंबा है। इस कॉरिडोर के क्षेत्र में से 6 किलोमीटर के क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग द्वारा एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जाना है। इस निर्माण को शुरू करने के लिए भी तैयारी प्रारंभ हो गई है। ऐसे में इस एलिवेटेड कॉरिडोर वाले क्षेत्र को छोडक़र बचे हुए 6 किलोमीटर के क्षेत्र में ही निगम को डिवाइडर बनाना है। इसमें भी देवास नाका के फ्लायओवर ब्रिज और सत्यसांई चौराहा के फ्लायओवर ब्रिज वाले क्षेत्र को भी छोडऩा पड़ेगा। इस तरह से बहुत कम क्षेत्र ऐसा बचता है, जिसमें निगम की ओर से डिवाइडर बनाने का काम किया जाएगा।