
इंदौर। एक तरफ भागीरथपुरा (Bhagirathpura) की स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है, तो दूसरी तरफ दूषित पानी से बीमार मरीज अभी भी मिल रहे हैं। पूरे भागीरथपुरा में 20 किलोमीटर लम्बाई में पाइप लाइन भी बिछाई जा रही है, जिसमें 60 दिन का समय लगेगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार घर-घर जाकर जांच की जा रही है और आसपास के नालों के गंदे और दूषित पानी के कारण ही भागीरथपुरा के सभी बोरिंगों का पानी खराब हुआ और चूंकि नर्मदा की लाइन से ही बोरिंग की लाइन जोड़ दी, उसके कारण पूरे क्षेत्र में दूषित जल बंट गया।
पूरे भागीरथपुरा के 60 हजार लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण भी निरंतर किया जा रहा है और पाइप लाइन डालने का काम भी तेजी से चल रहा है। लगभग 30 फीसदी लाइन डालने और उसकी टेस्टिंग करने की जानकारी भी दी गई है, तो भागीरथपुरा में 114 सरकारी और 80 से ज्यादा निजी बोरिंग बताए गए हैं और सभी का क्लोरिनेशन भी कराया गया। फिलहाल बोरिंगों का इस्तेमाल बंद कर दिया है, क्योंकि उसी के कारण लोग बीमार हुए हैं। अभी टैंकरों के जरिए ही निगम पानी बंटवा रहा है, तो सभी 105 टंकियों की सफाई से लेकर नमूनों की जांच भी शुरू करवाई है और वहीं निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने अमृत प्रोजेक्ट के तहत चल रहे सीवरेज और ड्रैनेज तथा जलप्रदाय से जुड़े सभी कार्यों की समीक्षा भी की।
उसके पहले अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और अनुपम राजन ने भी भागीरथपुरा का दौरा किया और उसके बाद जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक भी ली। निगम का कहना है कि नर्मदा लाइन के साथ-साथ ड्रेनेज लाइन का काम भी चल रहा है। तारा मेडिकल से टोपीलाल की दुकान तक 44 मीटर ड्रेनेज लाइन डाली गई, तो दीपेश स्कूल के पीछे 22 मीटर ड्रेनेज लाइन का काम पूरा किया गया। नदी किनारे क्षेत्र में भी 22 मीटर ड्रेनेज संधारण और साथ में आरसीसी मैन हॉल के काम भी चल रहे हैं। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी लगातार जुटी है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम तथा नर्सिंग स्टूडेंट इस पूरे अभियान में जुटे हैं और 200 से अधिक सदस्य प्रत्येक घर पहुंच रहे हैं। उल्टी-दस्त से बचाव की जानकारी भी दी जा रही है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर तीन एम्बुलेंस के साथ 24 ही घंटे चिकित्सकों की ड्यूटी भी लगाई गई है और जो भी नए मरीज मिलते हैं उन्हें अस्पतालों में भर्ती भी कराया जा रहा है।
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