
इंदौर। अभी पिछले दिनों अपर तहसीलदार कोर्ट ने कस्बा इंदौर की अनसर्वर्ड रेसीडेंसी क्षेत्र में शामिल सीआरपी लाइन के ब्लॉक नम्बर 38 की लगभग 40 हजार स्क्वेयर फीट नजूल जमीन पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण साबित किया था। इसका विस्तृत खुलासा अग्रिबाण ने 20 फरवरी को किया और आज प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर किए गए अतिक्रमण को मुक्त करवाया। वहीं कलेक्टर शिवम वर्मा के मुताबिक, मौके पर मौजूद मस्जिद और मुसाफिरखाने के निर्माण की भी जांच करवाई जाएगी। हालांकि उसके कुछ अवैध हिस्सों को आज तोड़ा भी गया है। इस मामले में महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि इस सम्पत्ति पर सेंट्रल वक्फ काउंसिल ने 80 लाख रुपए का लोन भी ले डाला और मौके पर लगभग 100 करोड़ रुपए कीमत की नजूल जमीन वक्फ बोर्ड के नाम पर हथिया ली गई। वर्षों पूर्व 300 स्क्वेयर फीट पर मस्जिद बनी थी, जिसका विस्तार करते हुए आसपास की जमीनें भी कब्जे में ले ली, जो गूगल सेटेलाइट ईमेज से भी प्रमाणित होती है।
मध्यप्रदेश शासन विरुद्ध सैयद शाहिर अली, मस्जिद अध्यक्ष सदर अंजुमन इस्ला उल मुस्लेमिन और वक्फ बोर्ड के मामले में अपर तहसीलदार कोर्ट से 6 पेज का विस्तृत आदेश जारी किया गया, जिसमें 40 हजार स्क्वेयर फीट से अधिक नजूल जमीन पर अतिक्रमण बताया गया। एमवाय अस्पताल के पीछे ब्लॉक नम्बर 38 की इस जमीन पर मस्जिद विस्तार के साथ मुसाफिर खाने, बाउण्ड्रीवॉल और अन्य निर्माण अवैध रूप से कर लिए गए। गूगल सैटेलाइज ईमेज से यह प्रमाणित हुआ कि 1985 में छोटी-सी मस्जिद मौके पर थी। मगर 2025 तक आसपास की जमीनों पर भी कब्जे कर लिए। विशेष रूप से 2012 से यह अवैध निर्माण शुरू हुए।
इतना ही नहीं, मस्जिद शब्द को भी भिन्न हैंडराइटिंग में लिखा गया और इस जमीन पर 80 लाख रुपए का लोन भी अंजूम इस्लाहुल मुसलमीन छावनी जामा मस्जिद के नाम से ले लिया, जिसकी सालाना 6 लाख रुपए की किश्त भी जमा करने की जानकारी आवेदक द्वारा अपर तहसीलदार कोर्ट में सुनवाई के दौरान दी गई। इसके साथ यह भी दावा किया या कि मस्जिद का कुल क्षेत्रफल 30 हजार 400 वर्गफीट है और उसी पर निर्माण किया गया। जबकि प्रशासन की जांच से यह साबित हुआ कि वक्फ की उक्त भूमिवक्फ बोर्ड की नहीं है और नजूल जमीन पर अतिक्रमण किया गया। इतना ही नहीं, सीआरपी लाइन की मस्जिद के संबंध में किसी तरह की एनओसी भी नजूल कार्यालय से जारी नहीं हुई। अलबत्ता निगम द्वारा जो अनुमति मस्जिद या मुसाफिरखाने के नाम पर दी गई उसका भी दुरुपयोग किया गया। कलेक्टर के मुताबिक मौके पर स्थित निर्माण कार्यों की भी जांच कराई जाएगी।
आज सुबह पुलिस, प्रशासन, निगम की सहायता से कुछ अवैध निर्माण तोड़े और अतिक्रमण कर हासिल की गई जमीन को मुक्त कराया गया। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रशासन ने पिछले दिनों रेसीडेंसी एरिया का सर्वे करवाया है और जमीन मालिकों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया की जा रही है। इसी के चलते कस्बा इंदौर की सीआरपी लाइन के पीछे की उक्त नजूल जमीन का भू-घोटाला भी सामने आया, जिसमें मस्जिद और मुसाफिरखाने के नाम पर बेशकीमती जमीन हड़प ली गई। मुसाफिरखाने के निर्माण के लिए 2003 में भवन अनुज्ञा जारी की गई और जांच में यह भी पाया गया कि 1985 में पुलिस लाइन छावनी मस्जिद की खसरा नम्बर 12 पर अंकित 3040 स्क्वेयर फीट जमीन पर पीडब्ल्यूडी द्वारा एनओसी दी गई। प्रशासन ने अपनी जांच के जो 5 बिन्दू तय किए उसमें सेटेलाइट ईमेज के अलावा यह भी साबित हुआ कि उक्त भूमि पर वर्षों पहले 300 वर्गफीट में निर्माण हुआ था और बाद के वर्षों में मस्जिद की मूल संरचना की आड़ में बाउण्ड्रीवॉल बनाकर नया निर्माण और विस्तार कर लिया गया। भू-राजस्व संहिता की धार 57 के तहत जो भूमि निजी स्वामित्व में सिद्ध नहीं हो उसे सरकारी माना जाता है, जिसके चलते 248 के तहत तहसीलदार को प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुएु उक्त जमीन प्रशासन ने अपने
कब्जे में ले ली।
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