तेहरान। ईरान ने अपनी सैन्य ताकत (Iran military) को लेकर बड़ा दावा किया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलीबाफ (Mohammed Bager Ghalibaf) के अनुसार, ईरानी सेना (Iranian military) ने हालिया घटनाओं में करीब 180 ड्रोन मार गिराए और अमेरिकी F-35 Lightning II फाइटर जेट को भी निशाना बनाया।
गलीबाफ ने इसे ईरान की बढ़ती रक्षा क्षमताओं का सबूत बताते हुए कहा कि F-35 पर हमला कोई एक बार की घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि मिसाइल हमले ने विरोधियों को ईरान की तकनीकी क्षमता का एहसास करा दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने भी पिछले महीने यह स्वीकार किया था कि एक F-35 जेट को नुकसान पहुंचने के बाद आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। हालांकि, इस घटना को लेकर आधिकारिक तौर पर पूरी पुष्टि सामने नहीं आई है।
ईरानी स्पीकर ने सैन्य घटनाओं को कूटनीति से जोड़ते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन कई अहम मामलों पर अब भी मतभेद कायम हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों की धमकियां और दबाव की रणनीति नाकाम रही, जिसके बाद बातचीत का रास्ता अपनाया गया।
गलीबाफ ने डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ईरान में शासन परिवर्तन और उसकी मिसाइल क्षमताओं को खत्म करने में असफल रहे।
उन्होंने कहा, “ईरान कोई वेनेजुएला नहीं है,” और दावा किया कि अमेरिकी प्रयास ईरान की रक्षा व्यवस्था को कमजोर नहीं कर सके।
युद्धविराम को लेकर भी दोनों पक्षों की सोच अलग बताई गई—
कितनी है सच्चाई?
ईरान के ये दावे उसकी आधिकारिक स्थिति को दर्शाते हैं, लेकिन स्वतंत्र रूप से इनकी पूरी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में दोनों पक्ष अक्सर अपने-अपने पक्ष को मजबूत दिखाने की कोशिश करते हैं।
कुल मिलाकर, यह बयानबाजी दिखाती है कि सैन्य ताकत और कूटनीति के बीच संतुलन बनाते हुए भी ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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