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न बिकेगा, न झुकेगा ISRO! निजीकरण की अफवाहों पर स्पेस एजेंसी का करारा जवाब

September 07, 2026

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण और उसकी भूमिका सीमित किए जाने की खबरों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच स्पेस एजेंसी ने स्थिति साफ कर दी है। ISRO ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उसकी केंद्रीय भूमिका बनी रहेगी।

दरअसल, सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं सामने आई थीं कि सरकार अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों को बढ़ावा देने के नाम पर ISRO की भूमिका कम करने या उसका निजीकरण करने की तैयारी कर रही है। ISRO ने इन दावों को बेबुनियाद बताते हुए स्पष्ट किया कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी का मतलब ISRO को कमजोर करना नहीं है।

ISRO ने खुद साफ किया पूरा मामला

ISRO ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए निजीकरण से जुड़ी अफवाहों पर स्पष्टीकरण दिया। एजेंसी के मुताबिक, भारत सरकार ISRO के नेतृत्व वाले नेशनल स्पेस इकोसिस्टम को विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।

इस मॉडल में अंतरिक्ष से जुड़ी वे तकनीकें, जो अब पूरी तरह विकसित और स्थापित हो चुकी हैं, उनके बड़े पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायिक इस्तेमाल की जिम्मेदारी निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को दी जा सकती है।

इसका मकसद ISRO की जगह निजी कंपनियों को खड़ा करना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की कुल क्षमता को कई गुना बढ़ाना है।


  • रूटीन काम से आगे बढ़ेगा ISRO

    निजी उद्योग के बढ़ते योगदान से ISRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को अत्याधुनिक और भविष्य की तकनीकों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।

    ISRO के सामने आने वाले वर्षों के लिए कई बड़े लक्ष्य हैं। इनमें 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य प्रमुख है।

    इसके अलावा मंगल और शुक्र जैसे ग्रहों के लिए डीप-स्पेस मिशन, री-यूजेबल लॉन्च व्हीकल और नई पीढ़ी की अंतरिक्ष तकनीकों पर भी काम जारी है।

    2035 का स्पेस स्टेशन, 2040 में चांद पर भारतीय

    भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च करने तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्षों में देश की महत्वाकांक्षा मानव अंतरिक्ष उड़ान और डीप-स्पेस एक्सप्लोरेशन की दिशा में आगे बढ़ने की है।

    2035 का भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन भारत की अंतरिक्ष क्षमता में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके बाद 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने की योजना इस कार्यक्रम को और महत्वाकांक्षी बनाती है।

    इसके लिए लॉन्च व्हीकल, मानव अंतरिक्ष उड़ान, जीवन समर्थन प्रणाली, डॉकिंग और री-यूजेबल स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी कई क्षमताओं को विकसित करना होगा।

    8.4 अरब डॉलर से 44 अरब डॉलर की स्पेस इकोनॉमी का लक्ष्य

    भारत सरकार की नजर सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धियों पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र को एक बड़े आर्थिक इंजन के रूप में विकसित करने पर भी है।

    दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत की मौजूदा स्पेस इकोनॉमी करीब 8.4 अरब डॉलर की है। लक्ष्य इसे 2033 तक 44 अरब डॉलर तक पहुंचाने का है।

    इतनी बड़ी स्पेस इकोनॉमी तैयार करने के लिए अकेले सरकारी संस्थानों के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं होगा। इसी वजह से निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष क्षेत्र में ज्यादा अवसर दिए जा रहे हैं।

    450 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स

    भारत में पिछले कुछ वर्षों में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। 2020 में जहां देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या बेहद सीमित थी, वहीं अब 450 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स के सक्रिय होने का दावा किया गया है।

    ये कंपनियां सैटेलाइट, लॉन्च सिस्टम, स्पेस एप्लीकेशन, ग्राउंड सिस्टम और दूसरी तकनीकों पर काम कर रही हैं।

    यानी सरकार की रणनीति यह है कि ISRO अत्याधुनिक और रणनीतिक तकनीकों के विकास पर फोकस करे, जबकि पहले से सफल और स्थापित तकनीकों का व्यावसायिक विस्तार निजी उद्योग के जरिए किया जाए।

    क्रिटिकल मिशनों की कमान ISRO के पास

    निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने के बावजूद राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक महत्व वाली परियोजनाओं में सरकार और ISRO की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

    इस लिहाज से अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण की जगह इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और राष्ट्रीय स्पेस इकोसिस्टम के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।

    स्पष्ट संदेश यही है कि ISRO की भूमिका खत्म करने की तैयारी नहीं है। बल्कि निजी उद्योग को साथ जोड़कर ISRO को ज्यादा बड़े और चुनौतीपूर्ण मिशनों के लिए तैयार किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में 2035 का स्पेस स्टेशन और 2040 का चंद्र मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की दिशा तय करने वाले दो बड़े पड़ाव साबित हो सकते हैं।

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