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जबलपुर पुलिस वेंटिलेटर पर! 539 पद खाली, सुरक्षा भगवान भरोसे

July 10, 2026

  • स्वीकृत 3803 पदों के मुकाबले सिर्फ 3264 तैनात
  • उधार की फोर्स से बच रही लाज
  • पेंडिंग केसों का लगा अंबार

जबलपुर। संस्कारधानी की कानून-व्यवस्था की चमकदार तस्वीर सरकारी प्रस्तुतियों और प्रेस विज्ञप्तियों में भले ही दिखाई देती हो, लेकिन पुलिस विभाग के भीतर झांकें तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। पुलिस बल की भारी कमी अब सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं रह गई, बल्कि यह सीधे-सीधे शहर की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने वाला संकट बन चुकी है। जिले में कुल 3,803 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 3,264 पुलिसकर्मी ही कार्यरत हैं। यानी 539 पद खाली हैं। यह कोई सामान्य कमी नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की क्षमता को प्रभावित करने वाली स्थिति है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिन पदों पर सबसे अधिक काम का बोझ होता है सब इंस्पेक्टर, एएसआई और आरक्षक उन्हीं श्रेणियों में सबसे ज्यादा रिक्तियां हैं।


  • वीआईपी आते ही क्यों कांपने लगता है पूरा पुलिस सिस्टम?
    जिले में किसी बड़े धार्मिक आयोजन, राजनीतिक कार्यक्रम या वीवीआईपी दौरे के दौरान पुलिस की वास्तविक क्षमता सामने आ जाती है।राष्ट्रपति का दौरा बना सबसे बड़ा उदाहरण 20-21 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जबलपुर दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए जबलपुर पुलिस के अपने संसाधन पर्याप्त नहीं थे। स्थिति ऐसी बनी कि दूसरे जिलों और विशेष सशस्त्र बल से लगभग 1,800 अतिरिक्त जवान बुलाने पड़े। इसके कुछ ही दिनों बाद मुहर्रम के अवसर पर संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 200 अतिरिक्त जवानों की मांग करनी पड़ी। सवाल यह है कि क्या जबलपुर जैसा संभागीय मुख्यालय और संवेदनशील जिला अपनी सुरक्षा व्यवस्था स्वयं संभालने की स्थिति में नहीं है?

    उधार की फोर्स कितनी कारगर?
    सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बाहर से आने वाले जवान अनुशासित जरूर होते हैं, लेकिन उन्हें स्थानीय भूगोल, अपराधियों के नेटवर्क, संवेदनशील गलियों, विवादित इलाकों और हिस्ट्रीशीटरों की गतिविधियों की जानकारी नहीं होती।यानी संख्या तो बढ़ जाती है, लेकिन स्थानीय खुफिया समझ और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता सीमित रह जाती है।

    रात की गश्त: रिकॉर्ड में ज्यादा, सड़क पर कम?
    स्टाफ की कमी का सबसे बड़ा असर रात की गश्त पर दिखाई देता है। कई थानों में उपलब्ध बल को दिनभर कोर्ट पेशी, वीआईपी ड्यूटी, बंदोबस्त, धरना-प्रदर्शन, गिरफ्तारी और विवेचना जैसे कार्यों में लगाना पड़ता है। इसके बाद नियमित गश्त के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मी नहीं बचते। इसी का फायदा उठाकर चोर, लुटेरे, नशा तस्कर, सटोरिये और असामाजिक तत्व कई क्षेत्रों में सक्रिय बने रहते हैं।

    महिलाओं की सुरक्षा भी प्रभावित
    शहर के अनेक बाजारों, कॉलेज मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थायी पुलिस उपस्थिति सीमित दिखाई देती है। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित पुलिस मौजूदगी अपराध रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम होती है। जहां पुलिस की दृश्य उपस्थिति कम होती है, वहां छेड़छाड़, मोबाइल स्नैचिंग और अन्य घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।

    सबसे बड़ा संकट : जांच अधिकारियों की कमी
    पुलिस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विवेचना है, लेकिन जबलपुर में यही व्यवस्था सबसे ज्यादा दबाव में है। रिकॉर्ड बताते हैं कि 80 सब इंस्पेक्टर के पद खाली 40 एएसआई के पद खाली इन अधिकारियों के पास हत्या, लूट, दुष्कर्म, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर मामलों की जांच की जिम्मेदारी होती है। एक-एक विवेचक के पास दर्जनों केस लंबित होने से जांच की गति प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप न्यायिक प्रक्रिया भी धीमी पड़ सकती है।

    24 घंटे की ड्यूटी… टूट रहा है पुलिसकर्मियों का मनोबल
    पुलिस विभाग के भीतर काम कर रहे कई कर्मचारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण लगातार लंबी ड्यूटी करनी पड़ती है। त्योहार, चुनाव, वीआईपी दौरे, धरना-प्रदर्शन और आकस्मिक घटनाओं के दौरान कई जवानों की ड्यूटी 16 से 24 घंटे तक खिंच जाती है। साप्ताहिक अवकाश नियमित रूप से मिलना भी चुनौती बन जाता है। मानसिक दबाव, पारिवारिक जीवन पर असर और लगातार थकान पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

    आंकड़ों की जुबानी पुलिस बल की तस्वीर
    पद                     स्वीकृत    तैनात       रिक्त
    एएसपी                   5           7              2
    सीएसपी                 14          10           4
    टीआई                     55          55         0
    सब इंस्पेक्टर          249       169        80
    एएसआई                529        389        140
    आरक्षक                 2,294      1,995      299
    सूबेदार                       5             5           0
    हवलदार                 650         636         14
    कुल                    3,803        3,264      539

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