
जबलपुर। मप्र सिविल सप्लाईज कारपोरेशन में करोड़ों रुपये के अनाज घोटाले ने शासन प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। जबलपुर में पदस्थ सीनियर अफसर व अन्य अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। वर्ष 2024 में शहपुरा वेयर हाउस से 26 हजार क्विंटल चावल टीकमगढ़ भेजा गया था,जिसमें से 18 हजार क्विंटल चावल अमानक निकला। इसके अलावा 2 मिलर ऋर्षि ट्रेडर्स और आयुषी ट्रेडर्स को 78 लॉट धान दी गई थी लेकिन डेढ़ साल बाद भी चावल वापस नहीं मिला। साथ ही धनपुरी के बीजापुरी कैंप में वर्ष 2018-19 से 5168 क्विंटल गेहूं खुले में रखा गया है जो अब सड़ चुका है। अधिकारी इस मामले में बोलने से बच रहे हैं और वे अब पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उनका जल्दी-जल्दी तबादला हो जाए ताकि वे इस आरोप प्रत्यारोपण व जांच पड़ताल से बच सके इस पूरे प्रकरण में करोड़ों का सरकारी नुकसान हुआ है और दोषी मौन साधे हुए हैं।
शहपुरा वेयर हाउस से टीकमगढ़ भेजे गए 26 हजार क्विंटल चावल में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जांच में 18 हजार क्विंटल चावल अमानक पाया गया है जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। इस गंभीर विषय पर भोपाल से नोटिस जारी होने के बावजूद जिला स्तर के अधिकारी इस पर कोई स्पष्ट जवाब देने से परहेज कर रहे हैं। विभाग के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक यह खेल सालों से चल रहा है और अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया है।
7 साल से सड़ रहा अनाज, कोई फिक्र नहीं
सिविल सप्लाईज कारपोरेशन द्वारा ऋर्षि ट्रेडर्स और आयुषी ट्रेडर्स को 78 लॉट धान चावल बनाने के लिए दी गई थी। करीब डेढ़ साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी इन दोनों ट्रेडर्स ने चावल वापस नहीं किया है। अफसरों की लापरवाही सरकार को करोड़ों का चूना लगा रही है और जिम्मेदारों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। आखिर क्यों इन मिलर्स पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है यह बड़ा प्रश्न है। धनपुरी के बीजापुरी कैंप में 7 साल से खुले में 5168 क्विंटल गेहूं पड़ा हुआ है। मुख्यालय से 30 किमी दूर स्थित इस केंद्र पर अनाज की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
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