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अफसरों के दफ्तर चकाचक, कर्मियों के नसीब में खंडहर!

July 10, 2026

  • मौत के साए में रादुविवि का गोपनीय विभाग, हर पल टूट रहा लेंटर, खुली सरिया और झूलते पंखे के नीचे काम करने को मजबूर कर्मचारी

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन की आंखें शायद तब खुलेंगी, जब यहाँ कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा हो जाएगा। विश्वविद्यालय का सबसे संवेदनशील माना जाने वाला गोपनीय विभाग, जहाँ से हजारों विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम, कॉपियां और अति-गोपनीय दस्तावेज संचालित होते हैं, आज खुद बदहाली और खौफ का टापू बन चुका है। विभाग के जिस कमरे में कर्मचारी दिन भर बैठकर काम करते हैं, उसकी छत का लेंटर सड़ चुका है, आरसीसी की सरिया बाहर आ गई हैं और प्लास्टर भरभराकर गिर रहा है। हैरानी की बात यह है कि सब कुछ जानने के बाद भी विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। इधर विश्वविद्यालय परिसर से जुड़े लोगों का सीधा आरोप है कि रादुविवि प्रशासन की प्राथमिकताएं पूरी तरह से उल्टी हैं। जहाँ वरिष्ठ अधिकारियों के आलीशान कमरों और कार्यालयों में समय-समय पर रंग-रोगन, मरम्मत और रखरखाव का काम वीआईपी स्तर पर कराया जाता है, वहीं विश्वविद्यालय की रीढ़ माने जाने वाले कर्मचारियों और विद्यार्थियों से जुड़े भवनों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।


  • सीलिंग फैन हवा में लटका, कभी भी हो सकता है वज्रपात
    गोपनीय विभाग के इस कक्ष की स्थिति इतनी खतरनाक हो चुकी है कि यहाँ लगा सीलिंग फैन भी बेहद कमजोर हो चुके जर्जर ढांचे के सहारे हवा में झूल रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे रोजाना अपनी जान हथेली पर रखकर ड्यूटी करने आते हैं। लेंटर का जो हिस्सा सड़ चुका है, यदि वह थोड़ा और टूटता है तो भारी-भरकम पंखे समेत पूरी छत नीचे बैठे कर्मचारियों के सिर पर आ गिरेगी। ऐसे में किसी की जान जाने या गंभीर रूप से घायल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

    सिर्फ कर्मचारियों की जान ही नहीं, लाखों छात्रों का रिकॉर्ड भी दांव पर
    यह लापरवाही सिर्फ कर्मचारियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इस जर्जर कक्ष में परीक्षा से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज रखे हुए हैं। बारिश के दिनों में छत से होने वाले रिसाव और सीलन के कारण यह खतरा और बढ़ जाता है। यदि किसी दिन छत का बड़ा हिस्सा गिरता है, तो लाखों विद्यार्थियों के करियर से जुड़े दस्तावेज नष्ट हो सकते हैं, जिससे पूरी परीक्षा प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी।

    शिकायतें ठंडे बस्ते में, नियम दरकिनार
    विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इस जर्जर भवन की लिखित और मौखिक शिकायतें विभागीय अधिकारियों से लेकर कुलसचिव और कुलपति स्तर तक कई बार की जा चुकी हैं। कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल देना प्रबंधन की कानूनी जिम्मेदारी है, लेकिन अफसरों ने न तो इस भवन का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया, न मरम्मत कराई और न ही इस संवेदनशील विभाग को किसी वैकल्पिक सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया।अतीत से नहीं लिया सबक: मध्य प्रदेश में पहले भी कई सरकारी और शैक्षणिक भवनों की छतें गिरने से निर्दोष कर्मचारियों की मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद रादुविवि प्रशासन का यह मौन बेहद खटकने वाला और आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है।

    जांच के दायरे में आने वाले तीखे सवाल
    जब गोपनीय विभाग का भवन इस कदर जर्जर हो चुका है, तो तकनीकी इंजीनियर से इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई? क्या विवि प्रशासन के अधिकारियों के दफ्तरों को चमकाने के बजट में से एक कमरे की मरम्मत नहीं करा सकता था? यदि इस लापरवाही के चलते कल को कोई जनहानि होती है, तो क्या रजिस्ट्रार और कुलपति पर सीधे आपराधिक मामला दर्ज नहीं होना चाहिए? क्या रादुविवि का प्रशासन कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

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