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जून 2026 व्रत-त्योहार कैलेंडर जारी, निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक पूरे महीने धार्मिक आयोजनों की भरमार

May 27, 2026

नई दिल्ली । जून 2026 का महीना धार्मिक(Religious) और आध्यात्मिक(Spiritual) दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान कई बड़े व्रत, पर्व और धार्मिक आयोजन एक साथ पड़ रहे हैं। पूरे महीने में श्रद्धालुओं के लिए उपवास, पूजा-पाठ और तीर्थ से जुड़े अवसरों की भरमार रहेगी। खास बात यह है कि इस महीने निर्जला एकादशी(Nirjala Ekadashi) जैसे अत्यंत कठिन और पुण्यदायी व्रत के साथ-साथ असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर(Kamakhya Temple) में आयोजित होने वाला अंबुबाची मेला(Ambubachi Mela) भी प्रमुख आकर्षण रहेगा।

जून की शुरुआत ही व्रत और धार्मिक आयोजनों के साथ होती है, जहां संकष्टी चतुर्थी और विभिन्न मासिक व्रतों का पालन किया जाएगा। महीने के मध्य तक कई महत्वपूर्ण तिथियां जैसे एकादशी, प्रदोष व्रत और अमावस्या जैसे पर्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं। ये सभी व्रत हिंदू धर्म में आध्यात्मिक शुद्धि और धार्मिक आस्था को मजबूत करने का प्रतीक माने जाते हैं।

15 जून के आसपास ज्येष्ठ मास का अधिक मास समाप्त होकर मूल ज्येष्ठ मास प्रारंभ होगा, जिससे इस महीने का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। इसी समय कई प्रमुख पर्वों का संयोग देखने को मिलता है, जिनमें संक्रांति और विभिन्न देवताओं से जुड़े व्रत शामिल हैं। इस अवधि में भक्त उपवास रखकर भगवान की आराधना करते हैं और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।

जून 2026 का सबसे प्रमुख व्रत निर्जला एकादशी 25 जून को मनाया जाएगा, जिसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। यह वर्ष की सबसे कठिन एकादशियों में से एक मानी जाती है, जिसमें भक्त बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इसी दिन गायत्री जयंती भी मनाई जाएगी, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।

इसी महीने असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या देवी मंदिर में विश्व प्रसिद्ध अंबुबाची मेला भी आयोजित होगा, जो 22 जून से 26 जून तक चलेगा। यह मेला शक्ति उपासना और तांत्रिक साधना के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान देवी कामाख्या का वार्षिक रजस्वला काल होता है, जिसके चलते मंदिर के कपाट कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। बाद में विशेष पूजा के साथ मंदिर पुनः भक्तों के लिए खोला जाता है।

महीने के अंत में वट पूर्णिमा व्रत, शनि प्रदोष और कई अन्य धार्मिक पर्व श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ते हैं। वट पूर्णिमा विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें वे वट वृक्ष की पूजा कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

  • इस प्रकार जून 2026 का पूरा महीना धार्मिक आस्था, व्रत-त्योहार और आध्यात्मिक गतिविधियों से भरा रहेगा, जो श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और परंपरा का विशेष संगम प्रस्तुत करेगा।

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