
नई दिल्ली: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) एक्ट के तहत जब्त की गई संपत्तियों (Properties) को लेकर कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति पी. चिदंबरम (Karti P. Chidambaram) को झटका लगा है. अपीलिएट ट्रिब्यूनल फॉर फॉरफिटेड प्रॉपर्टी ने उनकी अपील खारिज (Appeal Dismissed) कर दी है. कार्ति पी. चिदंबरम ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी दिल्ली के जोरबाग स्थित संपत्ति और बैंक खातों (Bank Account) की कुर्की को बरकरार रखा गया था.
ईडी ने 2018 में कार्ति चिदंबरम की संपत्ति को मनी लॉन्ड्रिंग केस में अटैच किया था. इन संपत्तियों में नई दिल्ली के जोरबाग इलाके का एक बंगला और चेन्नई के कई बैंक खातों में जमा करीब ₹6 करोड़ से ज्यादा की रकम शामिल है. कार्ति ने 2019 में इस कुर्की आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील की थी. उनका कहना था कि ईडी ने तय समय सीमा (365 दिन) के भीतर मुकदमा दायर नहीं किया, इसलिए संपत्ति की कुर्की अपने आप खत्म हो जानी चाहिए थी.
ईडी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान देशभर में लॉकडाउन और अदालतों के बंद रहने के कारण मुकदमा दायर करने में देरी हुई. सुप्रीम कोर्ट ने महामारी के दौरान सभी मामलों की समय सीमा (Limitation Period) बढ़ा दी थी, इसलिए यह देरी माफ मानी जानी चाहिए. ट्रिब्यूनल ने ईडी के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि कोरोना काल जैसी “असाधारण परिस्थिति” में देरी को गलत नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने खुद अपने आदेश में कहा था कि महामारी के कारण किसी भी तरह की कानूनी समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है. इसलिए, ईडी द्वारा जून 2020 में दाखिल की गई प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट को वैध माना गया और कार्ति चिदंबरम की संपत्तियों की कुर्की जारी रहेगी.
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