नई दिल्ली। लोकसभा (Lok Sabha) में मंगलवार को एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला जिसने संसदीय प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा छेड़ दी। विपक्ष के हंगामे के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोपहर 2:12 बजे ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पेश किया और महज तीन मिनट बाद, 2:15 बजे, सदन ने इसे बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, उस समय विपक्षी सांसद अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर नारेबाजी कर रहे थे, जिसके कारण सदन में सामान्य बहस नहीं हो सकी।
सरकार का कहना है कि इस संशोधन विधेयक का मकसद भारत को वैश्विक निवेश, विनिर्माण और कारोबार के लिए अधिक भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य बनाना है। इसके जरिए नीतिगत स्पष्टता बढ़ाने, विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देने की कोशिश की गई है।
विधेयक में विदेशी निवेश कोष (फंड) का संचालन करने वाले फंड मैनेजरों के लिए भारत में काम करना आसान बनाने का प्रस्ताव है। अब तक कई कर संबंधी शर्तों के कारण विदेशी निवेशक आशंकित रहते थे कि भारत में फंड मैनेजमेंट करने पर पूरा विदेशी फंड भारतीय कर व्यवस्था के दायरे में आ सकता है।
नए प्रावधानों के तहत अनावश्यक शर्तों को कम किया जाएगा, जबकि केवल वे नियम बनाए रखे जाएंगे जो कर दुरुपयोग और ‘राउंड ट्रिपिंग’ जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी हैं।
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अनुबंध आधारित विनिर्माण (कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग) को प्रोत्साहित करने के लिए कर छूट की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
इसका लाभ उन विदेशी कंपनियों को मिलेगा जो भारत में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और इनके प्रमुख पुर्जों के निर्माण से जुड़ी फैक्ट्रियों को मशीनरी, उपकरण या कंपोनेंट उपलब्ध कराती हैं। प्रस्ताव के अनुसार यह कर छूट अब वित्त वर्ष 2040-41 तक जारी रह सकेगी।
साथ ही, कस्टम्स वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे रखने वाली विदेशी कंपनियों को भी आयकर राहत देने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए भारतीय डेटा सेंटर के उपयोग से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया गया है। अब कई मामलों में पहले की तरह बहुस्तरीय सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।
इसके अलावा डेटा सेंटर को केवल प्रत्यक्ष स्वामित्व के बजाय लीज (पट्टे) के आधार पर संचालित करने का रास्ता भी प्रस्तावित किया गया है, जिससे निवेश और संचालन दोनों आसान हो सकें।
संशोधन में रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) में निवेश करने वालों को भी राहत देने का प्रस्ताव है। यदि संबंधित परिचालन कंपनी नई आयकर व्यवस्था अपनाती है, तब भी निवेशकों को मिलने वाला लाभांश कर-मुक्त बनाए रखने की व्यवस्था की गई है।
विधेयक में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 तथा आयकर अधिनियम की कुछ धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव भी शामिल है।
इसके तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों में बदलाव का रास्ता खोला गया है। साथ ही, 50 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाले व्यवसायों के लिए रुपे डेबिट कार्ड और भीम-यूपीआई (BHIM-UPI) जैसे निर्धारित डिजिटल भुगतान माध्यम स्वीकार करने से जुड़े प्रावधानों में आवश्यक संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन संशोधनों का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों, क्लाउड कंपनियों और अवसंरचना निवेशकों को भारत में अधिक भरोसेमंद कारोबारी माहौल उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि स्पष्ट नीतियां और प्रक्रियागत स्थिरता भारत को वैश्विक पूंजी और विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद करेंगी।
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