मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने इस मामले में केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर घटना पर सरकार की प्रतिक्रिया न देना भारत के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की अनदेखी है और इससे देश की विदेश नीति कमजोर होती दिख रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि भारत अपने ही समुद्री क्षेत्र में हुई ऐसी घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकता, तो हिंद महासागर क्षेत्र में खुद को “नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर” बताने का दावा कैसे किया जा सकता है।
होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीय नाविकों को लेकर चिंता
खरगे ने पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz क्षेत्र में भारत के झंडे वाले 38 जहाज और करीब 1100 भारतीय नाविक फंसे हुए हैं। जानकारी के अनुसार कैप्टन आशीष कुमार समेत दो भारतीय नाविकों की कथित तौर पर मौत भी हो चुकी है।
उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने किसी समुद्री राहत या बचाव अभियान की योजना बनाई है। साथ ही बढ़ती तेल कीमतों के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। खरगे ने कहा कि यदि देश के पास केवल 25 दिनों का तेल भंडार बचा है, तो ऐसी स्थिति में सरकार की आपात ऊर्जा योजना क्या है।
खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने विदेश मंत्रालय के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि कुछ भारतीय नागरिकों की मौत या लापता होने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं और कई भारतीय छात्र वहां से वीडियो संदेश जारी कर मदद की अपील कर रहे हैं।
खरगे ने पूछा कि प्रभावित क्षेत्रों से भारतीयों को निकालने के लिए क्या कोई ठोस योजना तैयार की गई है। उनके अनुसार मौजूदा हालात में सरकार का रुख भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों और वर्षों से तैयार की गई विदेश नीति के विपरीत दिखाई देता है।
श्रीलंका के पास डूबा था ईरानी युद्धपोत
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में शुरू हुआ तनाव अब हिंद महासागर तक पहुंच गया है। इसी दौरान भारत से लौट रहा ईरानी युद्धपोत IRIS Dena कथित तौर पर अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में Sri Lanka के पास डूब गया। इस हादसे में 80 से अधिक ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है, जबकि कई अन्य को श्रीलंकाई नौसेना ने बचाव अभियान के तहत सुरक्षित निकाल लिया। फिलहाल बचे हुए नौसैनिक श्रीलंका में ही हैं।
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