
नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन इंडिया की बैठक में सहयोगी दलों के बीच एकता और बेहतर तालमेल पर जोर दिए जाने के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी मंगलवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने पहुंचीं। यह बैठक सोनिया गांधी के 10 जनपथ स्थित आवास पर हुई।
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच विपक्षी गठबंधन की बैठक के बाद की राजनीतिक स्थिति और हालिया बंगाल चुनावों में भाजपा से हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही दोनों दलों की आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जा सकता है।
यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब सोमवार को विपक्षी गठबंधन की बैठक के दौरान सोनिया गांधी और ममता बनर्जी ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया था। कांग्रेस ने दोनों नेताओं की आत्मीयता दर्शाने वाली तस्वीरें भी साझा की थीं। तृणमूल कांग्रेस इस समय आंतरिक असंतोष के दौर से गुजर रही है।
पार्टी के कई सांसदों ने अलग गुट बनाने और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ जाने का फैसला किया है। बंगाल चुनावों में तृणमूल की हार और चुनाव के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं तथा सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमलों के बाद ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के बीच यह पहली बंद कमरे में होने वाली बैठक होगी।
इससे पहले इंडिया ब्लॉक की बैठक शुरू होने से पहले का एक दृश्य राजनीतिक घटनाक्रम पर भारी पड़ गया था। बैठक स्थल पर तय समय से कुछ मिनट पहले पहुंचीं कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का जिस आत्मीयता और गर्मजोशी के साथ स्वागत किया था, उसने विपक्षी राजनीति में बदलते समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। ममता के पहुंचते ही सोनिया ने उन्हें गले लगाया था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच करीब दस मिनट तक बातचीत हुई। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार, दोनों के बीच हुई सहज और आत्मीय बातचीत केवल औपचारिक शिष्टाचार भर नहीं थी।
इसे विपक्षी राजनीति में उभर रहे नए समीकरणों और बदलते रिश्तों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसकी वजह यह है कि पिछले कुछ समय से विपक्षी खेमे में ममता की भूमिका को लेकर नई चर्चा चल रही है। गठबंधन की बैठक में भी ममता सबसे सक्रिय नेताओं में शामिल रहीं और उन्होंने अपने संबोधन में बार-बार पुरानी बातों और मतभेदों को भुलाकर आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। सूत्रों का कहना है कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी मोर्चे को मजबूत करने की कवायद के बीच कई दल ममता को राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका में देखने के पक्षधर दिखाई दे रहे हैं।
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