
नई दिल्ली। पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने अपने कुख्यात ‘मरकज़ सुभानल्लाह’ कॉम्प्लेक्स को पूरी तरह से ठीक कर लिया है। भारत के सटीक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हवाई हमलों के बाद खंडहर हो चुके इस हेडक्वार्टर को सरकारी मदद से पूरी तरह से नया रूप दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक पता चला है कि हमले में टूटे गुंबदों का पुनर्निर्माण किया गया है। अंदर के सेंट्रल हॉल को नए प्लास्टर वाली दीवारों, चमकीले पेंट और बाहर से मंगाए गए मार्बल से सजाया गया है, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए संरचनात्मक नुकसान को पूरी तरह छिपा दिया गया है।
यह बड़े पैमाने पर किया गया पुनर्निर्माण उन शुरुआती रिपोर्टों के कुछ महीनों बाद हुआ है, जिनमें इस जगह पर मरम्मत का काम चलने की बात सामने आई थी। भारतीय सटीक मिसाइलों से मरकज़ के सेंट्रल हॉल में बने गहरे गड्ढों को अब सीमेंट और मलबे से पूरी तरह भर दिया गया है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ द्वारा पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किए जाने के 15 महीने बाद, बहावलपुर स्थित यह आतंकी ठिकाना एक बार फिर पूरी तरह चालू हो गया है। खुफिया सूत्रों ने पुष्टि की है कि पाकिस्तानी प्रशासन ने सीधे JeM को नकद किस्तों में 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (PKR) दिए। सरकारी फंड से मिली इस रकम में से आतंकी संगठन ने 11 करोड़ PKR खास तौर पर अपने सेंट्रल हॉल को नया रूप देने में खर्च किए।
इसके अलावा, पास की क्षतिग्रस्त इमारतों, जिनमें कुख्यात ब्रेनवाशिंग सेंटर ‘मदरसा अल-साबिर’ और आतंकी कमांडरों के रहने के क्वार्टर शामिल थे। इन सबको पूरी तरह हटा दिया गया ताकि नई इमारतें बनाई जा सकें।
हालांकि, JeM प्रमुख आतंकी मसूद अज़हर बीमारी के कारण सक्रिय भूमिका से दूर है। हेडक्वार्टर का कामकाज उसके भाइयों कट्टरपंथी कमांडर तलहा अल-सैफ और मोइनुद्दीन औरंगज़ेब उर्फ अम्मार अल्वी को सौंप दिया गया है। इस बीच, मास्टरमाइंड मसूद अज़हर और उसके भाई रऊफ़ असग़र पाकिस्तानी सरकारी तंत्र के संरक्षण में सुरक्षित ठिकाने पर रह रहे हैं। इन आतंकियों को सिंध के नवाबशाह ज़िले में पनाह दी गई है।
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