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DMRC की बड़ी कामयाबी, मिला देश का पहला ISO 55001:2024 सर्टिफिकेट

August 23, 2026

नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. DMRC को मुंबई मेट्रो लाइन-3 के एसेट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए प्रतिष्ठित ISO 55001:2024 सर्टिफिकेट प्रदान किया गया है. इस उपलब्धि के साथ ही DMRC भारत का पहला ऐसा मेट्रो संगठन बन गया है जिसे परिसंपत्ति प्रबंधन के इस नवीनतम अंतरराष्ट्रीय मानक के लिए प्रमाणित किया गया है.

DMRC के मुताबिक यह उपलब्धि केवल एक प्रमाणन नहीं, बल्कि मेट्रो परिसंपत्तियों के प्रबंधन में रोकथाम आधारित अनुरक्षण से आगे बढ़कर रणनीतिक, जोखिम-आधारित और जीवन-चक्र आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन की दिशा में DMRC की महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है.

ISO 55001:2024 मानक केवल रखरखाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपत्ति के प्रदर्शन, जोखिम, लागत और उसके पूरे जीवन-चक्र को संगठन के लक्ष्यों से जोड़ता है. DMRC के मुताबिक यह उपलब्धि रखरखाव-आधारित देखभाल से आगे बढ़कर एक रणनीतिक, जोखिम-आधारित और जीवन-चक्र आधारित प्रबंधन की ओर एक महत्वपूर्ण प्रगति है. इससे संपत्तियों की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है.


  • DMRC का कहना है कि यह सर्टिफिकेटरिकॉर्ड समय में हासिल किया है. इसके लिए Strategic Asset Management Plan को मजबूत करने, परिसंपत्ति प्रबंधन के उद्देश्यों को संगठनात्मक प्राथमिकताओं से जोड़ने, जोखिम आकलन एवं जीवन-चक्र नियंत्रणों को सुदृढ़ करने और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया. परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था की निरंतर निगरानी KPIs, ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा के माध्यम से की जा रही है.

    DMRC मुंबई मेट्रो लाइन-3 के 33.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर, जो कोलाबा, बांद्रा और SEEPZ को जोड़ता है, के परिचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रहा है. इसके अंतर्गत रोलिंग स्टॉक, ट्रैक्शन, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन, स्टेशन, लिफ्ट, एस्केलेटर, ट्रैक और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अनेक महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का सुरक्षित एवं कुशल प्रबंधन शामिल है.

    ISO 55001:2024 प्रमाणन के साथ DMRC ने सुरक्षा, विश्वसनीयता, दक्षता और स्थायित्व के अपने मूल उद्देश्यों को परिसंपत्ति प्रबंधन की एक वैश्विक रूप से मान्य प्रणाली के साथ और मजबूती से जोड़ा है. यह उपलब्धि भारत के शहरी रेल क्षेत्र में वैज्ञानिक, संरचित और जीवन-चक्र आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए एक नया benchmark स्थापित करती है. साथ ही, यह DMRC की उस क्षमता को भी प्रदर्शित करती है जिसके माध्यम से वह देश के विभिन्न शहरों में विश्वस्तरीय मेट्रो O&M एवं परिसंपत्ति प्रबंधन विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकता है.

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