
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) की बंडा तहसील में जहरीली शराब (Spurious liquor) पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सख्त रुख अपनाया है. रविवार सुबह ही मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. इसके बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 आबकारी और दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया, जबकि एक सीनियर अफसर को जिले से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।
घटना बंडा तहसील के गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन गांवों में सामने आई है. शुरुआती प्रशासनिक जानकारी के अनुसार जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है, जबकि स्थानीय बीजेपी विधायक ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. कई अन्य लोगों के बीमार होने की भी जानकारी सामने आई है।
3 अधिकारी सस्पेंड, 1 मुख्यालय अटैच
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माने जाने पर सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की आबकारी उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं, मामले में समान रूप से जिम्मेदार माने जाने पर उपायुक्त और संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है. यानी जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में कुल 4 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।
पुलिस विभाग ने भी इस प्रकरण में बंडा थाना प्रभारी श्री राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गुगरा चौकी प्रभारी एसआई श्री पूरन लाल लड़िया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार, 6 सितंबर की सुबह ही स्पष्ट रूप से कह दिया था कि इस घटना के लिए दोषी किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।
CM मोहन यादव ने कहा- दोषी किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को बेहद संवेदनशील बताते हुए अधिकारियों को तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नई दिल्ली प्रवास के दौरान जैसे ही उन्हें सागर की घटना की जानकारी मिली, उन्होंने सागर जिले के प्रभारी मंत्री और संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्र में तत्काल जांच के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को राहत और बीमार लोगों के लिए समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
मौके पर पहुंचा सीनियर अफसरों का दल
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समेत वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित इलाकों में पहुंचे. अधिकारी दल ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली. इसके साथ ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज और चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्क्रीनिंग भी कराई जा रही है, ताकि शराब पीने के बाद बीमार हुए लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
10 मौतों की प्रशासनिक पुष्टि, विधायक ने बताया आंकड़ा 11
सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बंडा तहसील के प्रभावित गांवों में अवैध जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है. हालांकि, स्थानीय बीजेपी विधायक वीरेंद्र लोधी ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. उन्होंने बताया कि बंडा सिविल अस्पताल से करीब 25 लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजा गया है।
कलेक्टर ने बताया कि बुखार और सिरदर्द जैसी शिकायत वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है. ऐसे तीन लोगों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (BMCH) भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है. उनके मुताबिक, इन मरीजों की हालत गंभीर नहीं है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका को लेकर कलेक्टर ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है।
ललितपुर से जहरीली शराब की सप्लाई का शक
घटना की जांच में शराब के संभावित स्रोत को लेकर भी बड़ा खुलासा सामने आया है. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि संदिग्ध शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से हुई थी।
कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, शुरुआती जांच में ललितपुर से इस तरह की जहरीली शराब की सप्लाई करने वाले एक गिरोह की जानकारी सामने आई है. चूंकि सागर का यह इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा के नजदीक है, इसलिए इस एंगल की भी जांच की जा रही है. हालांकि, शराब की वास्तविक सप्लाई चेन और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
प्रभावित इलाके की 7 शराब दुकानें सील
घटना के बाद जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं. प्रभावित क्षेत्र में सात शराब दुकानों को सील कर दिया गया है और शराब के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने अधिकारियों को अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।
शराब पीने वालों से प्रशासन की अपील
प्रशासन ने उन लोगों से तत्काल स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की है, जिन्होंने हाल के दिनों में शराब का सेवन किया था और अब उन्हें उल्टी, सिरदर्द, बुखार या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो रही है. अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर मेडिकल जांच कराएं।
कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग की
घटना को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी राज्य सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। ग्वालियर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य में शराब माफिया बेखौफ होकर लोगों की जान ले रहे हैं।
वहीं, बंडा के पूर्व कांग्रेस विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि बंडा विकासखंड के कई गांवों में शनिवार रात लोगों ने शराब पी थी, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. उन्होंने बताया कि कई लोगों को बंडा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि अन्य को सागर रेफर किया गया।
गुजरात की घटना के बाद MP में जहरीली शराब से मौतों ने बढ़ाई चिंता
मध्य प्रदेश में यह घटना ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत की घटना सामने आई थी। सागर की घटना के बाद अब प्रशासन की नजर अवैध शराब के नेटवर्क और इसके संभावित सप्लाई स्रोत पर है. फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट, शराब के सैंपल और जांच के आधार पर यह स्पष्ट होने का इंतजार है कि मौतों की वास्तविक वजह क्या थी और जहरीली शराब की सप्लाई में कौन-कौन लोग शामिल थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही साफ कर दिया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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