
भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में 10.2 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। वहीं, विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार तीनों डिस्कॉम को आगामी वित्तीय वर्ष में 6,044 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व घाटे का अनुमान है। सरकार के जवाब के मुताबिक वर्ष 2026-27 में बिजली वितरण कंपनियों का कुल व्यय 65,374 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि आय लगभग 59,330 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस अंतर को पाटने के लिए कंपनियों ने प्रस्ताव मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया है।
विशेषज्ञ बोले- घाटे की आधी राशि 12 वर्ष पुरानी
विद्युत मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि 6,044 करोड़ रुपये के कथित घाटे में 3,451 करोड़ रुपये की वह राशि भी शामिल है, जो 12 वर्ष पुरानी है और जिसे आयोग पहले ही खारिज कर चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर अतिरिक्त 750 करोड़ रुपये की मांग की गई है, जिससे उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा। अग्रवाल ने टैरिफ वृद्धि का विरोध करते हुए प्रस्ताव वापस लेने की मांग की है।
राजस्व वसूली मजबूत करना चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार घाटा और उच्च लाइन लॉस वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना रहे हैं। आने वाले समय में परिचालन दक्षता बढ़ाना और राजस्व वसूली मजबूत करना बड़ी चुनौती होगी। वहीं अधिकारियों का कहना है कि घाटा कम करने के लिए स्मार्ट मीटरिंग, लाइन लॉस में कमी, फीडर पृथक्करण और तकनीकी सुधार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही वितरण कंपनियों की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास भी जारी हैं।
औसत बिजली दर वृद्धि
वर्षवार औसत टैरिफ वृद्धि को लेकर जानकारी दी गई कि 2017-18: 9.48%, 2018-19: 0%, 2019-20: 7.01%, 2020-21: 1.98%, 2021-22: 0.63%, 2022-23: 2.64%, 2023-24: 1.65%, 2024-25: 0.07% और 2025-26: 3.46% की जानकारी दी गई।
पूर्व और मध्य क्षेत्र कंपनी 9 साल से घाटे में
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक लगातार घाटा हुआ। 2016-17: 787.76 करोड़ घाटा, 2017-18: 2,190.46 करोड़ घाटा, 2018-19: 2,896.68 करोड़ घाटा, 2019-20: 1,571.34 करोड़ घाटा, 2020-21: 2,754.14 करोड़ घाटा, 2021-22: 617.84 करोड़ घाटा, 2022-23: 2,451.74 करोड़ घाटा, 2023-24: 1,871.24 करोड़ घाटा, 2024-25: 1,047.28 करोड़ घाटा की जानकारी दी गई। वहीं, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भी पूरे नौ वर्षों तक घाटे में रही। 2016-17: 1,233.11 करोड़ घाटा, 2017-18: 2,716.29 करोड़ घाटा, 2018-19: 3,837.52 करोड़ घाटा, 2019-20: 1,275.15 करोड़ घाटा, 2020-21: 1,449.74 करोड़ घाटा, 2021-22: 257.54 करोड़ घाटा, 2022-23: 251.59 करोड़ घाटा, 2023-24: 2,013.80 करोड़ घाटा, 2024-25: 1,570.64 करोड़ घाटा हुआ है।
पश्चिम क्षेत्र कंपनी को 4 बार मुनाफा
इसके अलावा इसके विपरीत, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने नौ वर्षों में चार बार लाभ दर्ज किया। जानकारी के अनुसार 2016-17: 553 करोड़, 2019-20: 929 करोड़, 2020-21:228 करोड़, 2024-25: 730 करोड़ का लाभ हुआ है। वहीं, 2017-18: 157 करोड़, 2018-19: 565 करोड़, 2021-22: 1,790 करोड़, 2022-23: 1,130 करोड़, 2023-24: 125 करोड़ का घाटा हुआ है।
लाइन लॉस में बड़ा अंतर
पूर्व क्षेत्र में लाइन लॉस 2014-15 में 21.69% था, जो 2018-19 में बढ़कर 30.57% तक पहुंच गया। हाल के वर्षों में यह 27% के आसपास बना हुआ है। मध्य क्षेत्र में 2018-19 में लाइन लॉस 36.69% तक पहुंच गया था। 2022-23 में यह 22.92% दर्ज किया गया। वहीं पश्चिम क्षेत्र में लाइन लॉस तुलनात्मक रूप से कम रहा। 2014-15 में 21.05% से घटकर 2022-23 में मात्र 3.91% रह गया।
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