
नई दिल्ली। म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग शनिवार को बिहार के बोधगया पहुंचे। भारत सरकार ने उनके दौरे का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के बीच गहरे आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और जन-जन के संबंधों का प्रतीक बताया है। राष्ट्रपति ह्लाइंग का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब उन्होंने हाल ही में म्यांमार के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाली है। बोधगया पहुंचने पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया।
भारत पहुंचने के बाद राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने बोधगया स्थित पवित्र महाबोधि मंदिर का दौरा किया। यह बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल स्थल है। बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंधों के कारण यह यात्रा विशेष महत्व रखती है। राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग का यह दौरा 30 मई से 2 जून तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आए म्यांमार के राष्ट्रपति का यह वर्तमान पद संभालने के बाद पहला भारत दौरा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान भारत और म्यांमार के बीच सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी, व्यापार और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य म्यांमार के साथ अपने मित्रतापूर्ण और सभ्यतागत संबंधों को और आगे बढ़ाना है। जायसवाल ने बताया कि राष्ट्रपति की यात्रा में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं।
राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग 1 जून को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और रक्षा, व्यापार, संपर्क परियोजनाओं तथा क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा राष्ट्रपति नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जहां दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति का दौरा 2 जून को मुंबई में समाप्त होगा। वहां वे भारी उद्योगों से जुड़े कार्यक्रमों, कारोबारी बैठकों और विभिन्न औद्योगिक स्थलों का दौरा करेंगे।
म्यांमार भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ोसी देश है। दोनों देशों के बीच लगभग 1640 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जो पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों, विशेष रूप से नागालैंड और मणिपुर से जुड़ी हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा सुरक्षा, उग्रवाद पर नियंत्रण, संपर्क परियोजनाएं और व्यापारिक सहयोग दोनों देशों के संबंधों के प्रमुख मुद्दे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग और व्यापारिक संबंधों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भारत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है। PM मोदी ने पिछले वर्ष मॉरीशस यात्रा के दौरान ‘महासागर’ (MAHASAGAR – Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन पेश किया था। माना जा रहा है कि म्यांमार के साथ बढ़ता सहयोग इस रणनीति को और मजबूती देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग का यह दौरा भारत-म्यांमार संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को भी और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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