
मधुबनी। पड़ोसी राष्ट्र नेपाल (Nepal) में बालेन सरकार (Balen Government) के सत्ता में आते ही उनके द्वारा लिए गए कई फैसलों ने भारत-नेपाल मैत्री व्यवस्था (India-Nepal Friendship Arrangement) में बनी मिठास को फीका कर दिया है। नेपाल सरकार द्वारा कृत्रिम रूप से (दवा देकर) पकाए जाने वाले फलों, जैसे आम और केला पर प्रतिबंध का असर दोनों देशों के बीच कारोबार करने वाले व्यापारियों पर पड़ने लगा है।
व्यपारियों को झटका
पूर्व में आम और केला नेपाल के व्यापारी आसानी से सीमावर्ती बाजारों से खरीदकर नेपाल ले जाते थे, जिससे व्यवसाय करने वाले व्यापारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती थी, लेकिन नेपाल सरकार द्वारा एकाएक लिए गए प्रतिबंध के फैसले ने दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार करने वाले व्यापारियों को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है।
क्या बोले व्यापारी?
सीमावर्ती जयनगर के सब्जी मंडी अशोक बाजार में आम का थोक कारोबार करने वाले व्यवसायी राजकुमार महतो, बादल साह, शत्रुघ्न यादव, मो. सद्दाम, मो. शकील, इस्राइल मुखिया एवं कन्हैया लाल बनारसी की मानें तो नेपाल में बालेन सरकार के सत्ता में आने के बाद, सरकार द्वारा भारत से पके आम और केले के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस कारण नेपाल में आम का व्यवसाय करने वाले व्यापारी जयनगर समेत सीमावर्ती बाजारों में आम की खरीदारी के लिए नहीं आ रहे हैं। भीषण गर्मी पड़ने के कारण फल जल्दी पक रहे हैं, जिससे कई क्विंटल आम बर्बाद हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रतिबंध से जयनगर बाजार में रोज करीब 10 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
दुकानदारों से मिली जानकारी के अनुसार, जयनगर बाजार में प्रत्येक दिन 10 लाख रुपये के आम का कारोबार होता है, जिसमें प्रतिदिन करीब छह ट्रक आम की बिक्री होती है। जयनगर से हिमसागर, मालदा, बंबई, बीजू और लखना आम नेपाल जाता था। इसमें मधुबनी के किसानों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आने वाले आम भी शामिल होते हैं। इस प्रतिबंध का सीधा असर आम के किसानों और व्यापारियों पर पड़ेगा।
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