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क्रिप्टो पर पाकिस्तान में नया विवाद: बड़े इस्लामी विद्वान ने बिटकॉइन समेत सभी डिजिटल एसेट्स को बताया ‘हराम’, सरकार की योजनाओं पर उठे सवाल

July 16, 2026

नई दिल्ली। पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर चल रही सरकारी तैयारियों के बीच बड़ा धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। कराची स्थित प्रतिष्ठित इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम कराची के प्रमुख मुफ़्ती मोहम्मद तकी उस्मानी (Mufti Muhammad Taqi Usmani) ने क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग को शरीयत के अनुसार ‘हराम’ करार देते हुए बिटकॉइन, एथेरियम, USDT (टेदर), स्टेबलकॉइन्स और अन्य ब्लॉकचेन आधारित टोकनों की खरीद-बिक्री को गैर-इस्लामी बताया है। इस फतवे के बाद पाकिस्तान में क्रिप्टो सेक्टर के भविष्य और सरकार की डिजिटल एसेट नीति पर नई बहस शुरू हो गई है।

फतवे में क्या कहा गया?

मुफ़्ती तकी उस्मानी के जारी धार्मिक मत के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी इस्लामी कानून के तहत वैध संपत्ति (माल) की श्रेणी में नहीं आती। इसलिए इनकी खरीद-बिक्री और निवेश को शरीयत के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

फतवे में स्पष्ट किया गया है कि केवल नाम बदल देने से किसी डिजिटल संपत्ति की धार्मिक स्थिति नहीं बदलती। यानी बिटकॉइन, एथेरियम, स्टेबलकॉइन, वर्चुअल करेंसी, ब्लॉकचेन टोकन और USDT जैसे सभी डिजिटल एसेट्स इस फैसले के दायरे में आते हैं।

ऐसे समय आया फैसला जब सरकार बढ़ा रही है क्रिप्टो सेक्टर

यह धार्मिक फैसला ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान सरकार देश में क्रिप्टो उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय है। सरकार पहले ही ‘पाकिस्तान वर्चुअल एसेट्स रेगुलेटरी अथॉरिटी’ (PVARA) बनाने की घोषणा कर चुकी है, जिसका उद्देश्य क्रिप्टो एक्सचेंजों को लाइसेंस देना और डिजिटल एसेट्स के लिए नियामक ढांचा तैयार करना है।

सरकार का दावा है कि इस पहल से विदेशी निवेश आकर्षित होगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा बिटकॉइन माइनिंग के लिए बिजली आवंटित करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। हालांकि धार्मिक संगठनों और कई उलेमा ने शुरू से ही इस पहल का विरोध किया है।


  • WLF के साथ पाकिस्तान की साझेदारी पर भी असर पड़ सकता है

    क्रिप्टो को लेकर यह विवाद इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान ने हाल ही में World Liberty Financial (WLF) से जुड़ी कंपनी SC Financial Technologies के साथ समझौता किया है।

    इस समझौते के तहत WLF के डॉलर आधारित स्टेबलकॉइन USD1 का उपयोग पाकिस्तान में सीमा-पार भुगतान (Cross-Border Payments) के लिए किए जाने की योजना बनाई गई थी। इस समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान कंपनी के CEO जैक विटकॉफ इस्लामाबाद पहुंचे थे, जहां प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और वित्त मंत्री भी मौजूद थे।

    क्या है World Liberty Financial?

    World Liberty Financial (WLF) एक क्रिप्टो कारोबार से जुड़ी कंपनी है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़ा बताया जाता है। कंपनी का प्रमुख उत्पाद USD1 नाम का डॉलर-आधारित स्टेबलकॉइन है। कंपनी के संचालन में डोनाल्ड ट्रंप जूनियर, एरिक ट्रंप और उनके सहयोगियों की भूमिका बताई जाती है।

    यदि पाकिस्तान में धार्मिक स्तर पर क्रिप्टो के खिलाफ माहौल मजबूत होता है, तो WLF जैसी कंपनियों की योजनाओं और सरकार की डिजिटल एसेट रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।

    आगे क्या होगा?

    मुफ़्ती तकी उस्मानी का फतवा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन पाकिस्तान में उनका धार्मिक प्रभाव काफी व्यापक माना जाता है। ऐसे में यह फैसला सरकार की क्रिप्टो नीति, निवेशकों के भरोसे और डिजिटल एसेट्स को लेकर सार्वजनिक धारणा पर असर डाल सकता है। अब यह देखना होगा कि सरकार आर्थिक सुधारों की अपनी रणनीति पर कायम रहती है या धार्मिक आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीति में बदलाव करती है।

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