
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार को होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता से पहले माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंच चुके हैं, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उसकी दो प्रमुख शर्तें पूरी नहीं होतीं तो आगे कोई बातचीत नहीं होगी. इस सख्त रुख के चलते शांति वार्ता पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं.
ईरान की तरफ से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ कर रहे हैं. ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुका है और उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात के दौरान अपना रुख स्पष्ट करने की तैयारी कर ली है.
ईरान की 2 सख्त शर्तें
ईरान ने कहा है कि इन शर्तों के बिना किसी भी आगे की बातचीत का कोई मतलब नहीं है.
इस्लामाबाद पहुंचने पर ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अमेरिका पर भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि पिछले वार्ताओं में ईरान की अच्छी नीयत के बावजूद उन पर हमले हुए और युद्ध जैसी परिस्थितियां पैदा की गईं. बीबीसी उर्दू के अनुसार गालिबाफ ने कहा, “हमारी मंशा अच्छी है, लेकिन हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है.” उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान ईरान के खिलाफ कार्रवाई की गई और युद्ध अपराध तक हुए.
गालिबाफ ने आगे कहा कि अगर अमेरिका वास्तव में समझौता चाहता है और ईरान के अधिकारों को मान्यता देता है, तो ईरान भी समझौते के लिए तैयार है. लेकिन अगर यह बातचीत सिर्फ ताकत दिखाने या धोखे की रणनीति के लिए है, तो ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार रहेगा. ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि हाल के संघर्षों में उनकी जवाबी कार्रवाई इस बात का सबूत है कि ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बिना शर्तों के कोई भी आगे की वार्ता संभव नहीं होगी.
इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बातचीत को देखते हुए पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुका है. उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर भी मौजूद हैं.
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