
जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज सोमवार को कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बच्चों, लड़कियों और महिलाओं के लिए बनी 37 में से 21 योजनाओं के तहत कोई खर्च ही नहीं किया गया, जबकि इनके लिए करीब 3 हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर दिया गया था.
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि इन योजनाओं का मकसद राज्य में एक करोड़ से अधिक बच्चों, छात्राओं और महिलाओं को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाना था. कांग्रेस नेता ने कहा, “CAG रिपोर्ट ने विधानसभा के सामने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की एक और शर्मनाक सच्चाई उजागर की है. बच्चों और लड़कियों के साथ-साथ महिलाओं के लिए चलाई जा रही 37 योजनाओं में से 21 पर जमीनी स्तर पर एक रुपया तक खर्च नहीं किया गया.”
रिपोर्ट का हवाला देते हुए अशोक गहलोत ने दावा किया कि कालीबाई भील स्कूटी योजना के तहत आवंटित 21.61 करोड़ रुपये, मां-बाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 6 करोड़ रुपये और शिक्षा का अधिकार (Right to Education, RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों की फीस की रिम्बर्समेंट के लिए 55.31 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए गए.
गहलोत ने आगे दावा किया कि कॉलेज जाने वाली लड़कियों और महिलाओं के लिए बनी 9 योजनाओं में से किसी के भी तहत कोई खर्च नहीं किया गया, जिनमें लाड़ली सुरक्षा योजना और छोड़ी गई महिलाओं (Deserted Women) के लिए पेंशन योजना शामिल हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि BJP सरकार पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई जन-कल्याणकारी योजनाओं को “अनौपचारिक रूप से बंद” करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह सवाल भी किया कि अगर सरकार ने इन योजनाओं को जारी रखने का फैसला किया था, तो इनके लिए घोषित आवंटन का अब तक इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, “यह लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों, बेटियों और महिलाओं के साथ सरासर धोखा है.”
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