
डेस्क: भारत में 10-मिनट में डिलीवरी का ट्रेंड जोमेटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) ने शुरू किया था. अब ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनियां Amazon.com Inc. और Walmart Inc. की Flipkart भी इस मार्केट में उतरने की तैयारी कर रही हैं. जोमेटो, जिसकी सर्विस ‘ब्लिंकिट’ (Blinkit) अंडे से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का सामान कुछ ही मिनटों में घर तक पहुंचाती है, के शेयर गुरुवार की क्लोजिंग तक अक्टूबर के अपने ऑल-टाइम हाई से 28 फीसदी गिर गए हैं. वहीं, इसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी की सर्विस ‘इंस्टामार्ट’ (Instamart) की मालिक स्विगी के शेयर सितंबर में अपने हालिया पीक से लगभग 47 फीसदी गिर गए हैं. बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निवेशकों के घबराने के कारण इन दोनों कंपनियों के मार्केट वैल्यू में 15 बिलियन डॉलर (1.41 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा की गिरावट आई है.
Amazon और Flipkart भारत के तेजी से बढ़ते 11 बिलियन डॉलर के रैपिड-कॉमर्स सेगमेंट पर जोर दे रही हैं. वे छोटे शहरों में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए ‘डार्क स्टोर्स’ (लास्ट-माइल वेयरहाउस) का नेटवर्क बना रही हैं. इस बीच, Zepto Ltd. IPO के जरिए 1 बिलियन डॉलर तक जुटाने की योजना बना रही है ताकि मार्केट लीडर ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट का मुकाबला करने के लिए फंड इकट्ठा कर सके. ज़ोमेटो में शेयर रखने वाले फ्रैंकलिन टेम्पलटन फंड मैनेजर यी पिंग लियाओ ने एक इंटरव्यू में कहा कि अभी चुनौती यह है कि प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है, इसलिए शॉर्ट-टर्म में मुनाफा कम है. जोखिम इस बात का है कि यह कड़ी प्रतिस्पर्धा कितने समय तक चलेगी. सिएटल स्थित Amazon, जिसने पिछले साल अल्ट्रा-फ़ास्ट डिलीवरी शुरू की थी, अपनी देर से एंट्री की भरपाई कर रही है. कंपनी ने पिछले हफ्ते ‘Amazon Now’ सर्विस को अभी के 15 से ज्यादा शहरों और कस्बों से बढ़ाकर 300 से ज्यादा शहरों और कस्बों तक ले जाने की योजना की घोषणा की. साथ ही, उसने देश में अपने AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने के लिए 13 बिलियन डॉलर और निवेश करने का वादा किया है.
रिपोर्ट के अनुसार, Flipkart Minutes ने दो साल से भी कम समय में 130 शहरों तक अपनी सर्विस पहुंचाने के लिए 1,000 डार्क स्टोर्स का नेटवर्क बना लिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि Flipkart अगले कुछ महीनों में 180 से ज्यादा ज़्यादा शहरों में 1,500 स्टोर खोलने की योजना बना रही है. ऐशमोर इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट इंडिया LLP की चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर राशि तलवार भाटिया ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि स्टोर बढ़ाने और भारी डिस्काउंट देने की वजह से, हमें लगता है कि Amazon मौजूदा कंपनियों से कुछ मार्केट शेयर छीन लेगी.
15 मई की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च को खत्म हुए साल में ब्लिंकइट के पास 2,243 डार्क स्टोर थे, जबकि स्विगी के पास 1,143 स्टोर थे. अरबपति मुकेश अंबानी की कंपनी अपने JioMart प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग कैटेगरी में क्विक कॉमर्स में आगे बढ़ने के लिए रिलायंस रिटेल लिमिटेड के बड़े फिजिकल स्टोर नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही है. इस महीने की शुरुआत में हुई सालाना आम बैठक में रिलायंस के शेयरहोल्डर्स को बताया गया कि कंपनी का 3,100 से ज्यादा स्टोर का नेटवर्क 1,200 से ज्यादा शहरों में सर्विस देता है.
मैक्वेरी के एनालिस्ट आदित्य सुरेश और बैजू जोशी ने मई की रिपोर्ट में लिखा कि हम कई मोर्चों पर – जैसे कि Amazon Now और Flipkart Minutes जैसे हॉरिजॉन्टल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ओमनी-चैनल रिटेल के बीच कुछ महीनों तक नहीं बल्कि काफी सालों तक का कढ़ा कंप्टीशन दे रहे हैं. ब्रोकरेज फर्म ने Eternal और Swiggy के टारगेट प्राइस घटा दिए और Swiggy की रेटिंग को ‘अंडरपरफॉर्म’ कर दिया. Eternal के लिए पहले से ही ‘अंडरपरफॉर्म’ रेटिंग है.
क्विक कॉमर्स की दो बड़ी मौजूदा कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का दायरा कम होने से Zepto की लिस्टिंग को लेकर उत्साह भी थोड़ा कम हुआ है, जो अगले महीने होने की उम्मीद है. 2021 में स्टैनफोर्ड से पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले दो लोगों द्वारा शुरू की गई Zepto ही लोकल मार्केट में 10 मिनट में डिलीवरी का कॉन्सेप्ट लेकर आई थी.
लेकिन यह कंपनी लोकल इक्विटी मार्केट में ऐसे समय में आ रही है जब बहुत ज्यादा पैसे वाले प्रतिद्वंद्वी तेजी से डिलीवरी के इस दुनिया के सबसे चर्चित प्रयोग में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं. UnlistedZone.com के डेटा के मुताबिक, फरवरी से अनलिस्टेड मार्केट में Zepto के शेयर 32 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं और 58 रुपए से घटकर 39 रुपए हो गए हैं.
जहां ब्लिंकिट दिसंबर तिमाही में EBITDA-लेवल पर मुनाफा दिखाने में कामयाब रही, वहीं स्विगी के क्विक कॉमर्स ऑपरेशन्स को सालाना लगभग 460 मिलियन डॉलर और जेप्टो को 600 मिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ. ब्लिंकिट के प्रमुख का मानना है कि अगर इस सेक्टर में कोई बड़ा बदलाव या छंटनी होती है, तब भी कंपनी अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. वहीं, स्विगी ने इस प्राइस वॉर (कीमतों की जंग) से दूर रहने का वादा किया है. फ्रैंकलिन के लियाओ को उम्मीद है कि ब्लिंकिट का बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और काम करने की क्षमता उसे इस कॉम्पिटिशन का सामना करने में मदद करेगी.
लेकिन कॉम्पिटिशन कम नहीं हो रहा है. बल्कि मार्केट शेयर हासिल करने की इस जबरदस्त लड़ाई में कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर पूरी ताकत लगा रही हैं. प्रणव क्षत्रिय की अगुवाई में एमके (Emkay) के एनालिस्ट्स ने 14 जून की अपनी रिपोर्ट में कहा कि अच्छी बात यह है कि डिमांड में तेजी सिर्फ मेट्रो शहरों तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि यह टियर-2 और टियर-3 शहरों तक भी फैल गई है. इससे पता चलता है कि क्विक-कॉमर्स मॉडल पूरे भारत में पसंद किया जा रहा है. हालांकि, इस ट्रेंड के बावजूद रैपिड डिलीवरी सेगमेंट में कड़ी टक्कर जारी है. एमके की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सेक्टर अभी भी मार्केट पर कब्जा करने की होड़ (लैंडग्रैब फेज) के दौर से गुजर रहा है, और अमेजन व फ़्लिपकार्ट के आने से कॉम्पिटिशन और भी तेज बना रहेगा.
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