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यूपी चुनाव से पहले SIR पर विपक्ष की एकजुटता से NDA की बढ़ी चिंता, अब क्या होगी रणनीति?

October 07, 2026

नई दिल्ली। मतदाता सूची (Voter List) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे ने विपक्षी दलों को एक मंच पर आने का मौका दिया है। वहीं, आगामी विधानसभा चुनावों (Assembly elections) को देखते हुए भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सामने विपक्ष के हमले का जवाब देने के साथ जनता का भरोसा बनाए रखने की चुनौती भी है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के सामने लगातार कई मुद्दे आए हैं। नीट पेपर लीक के बाद देशभर में हुए छात्र आंदोलन और उसके बाद एसआईआर को लेकर विपक्ष के विरोध ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाईं। नीट मामले में सरकार को छात्रों के दबाव के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा था। इसके बाद एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग को घेरना शुरू किया।

शुरुआत में विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर एकजुटता पूरी तरह नजर नहीं आ रही थी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इसी आधार पर विपक्ष पर पलटवार किया। हालांकि, सड़कों पर हुए विरोध प्रदर्शनों और अलग-अलग विपक्षी दलों की भागीदारी ने उन्हें साझा मंच पर आने का अवसर दिया।

हालात संभालने के लिए नए रास्ते तलाश रही सरकार

विपक्ष के आंदोलन में छात्र संगठनों की भागीदारी और जनता के एक वर्ग के समर्थन के संकेतों ने सत्तारूढ़ गठबंधन की चिंता बढ़ाई है। चुनाव आयोग को लेकर उठे विवाद के बीच सरकार अब स्थिति को संभालने के लिए नए राजनीतिक और संचार विकल्पों पर विचार कर रही है।

एनडीए के नेताओं के बीच यह चर्चा है कि इस मुद्दे पर केवल विपक्ष के आरोपों का जवाब देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जनता के बीच चुनाव प्रक्रिया को लेकर भरोसा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।


  • विपक्ष के अभियान की धार कम करने की तैयारी

    विपक्ष एसआईआर और चुनाव आयोग के मुद्दे पर सीधे भाजपा और केंद्र सरकार को निशाना बना रहा है। ऐसे में भाजपा के सामने अपने राजनीतिक पक्ष को स्पष्ट करने की चुनौती है। पार्टी के आयोग के समर्थन में खुलकर खड़े होने से बने राजनीतिक माहौल को बदलने के लिए एनडीए की ओर से देशभर में अभियान चलाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित अभियान का उद्देश्य विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ एसआईआर को लेकर अपना पक्ष जनता तक पहुंचाना हो सकता है।

    यूपी समेत पांच राज्यों के चुनाव पर नजर

    आगामी विधानसभा चुनावों के कारण यह मुद्दा एनडीए के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने अपने सहयोगी दलों को साथ लेकर विपक्ष के हमलों का जवाब देने की चुनौती है।

    एनडीए के घटक दल जनता दल यूनाइटेड (जदयू), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और अपना दल समेत अन्य सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, एसआईआर को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन अभी स्पष्ट नहीं है।

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