
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मभूमि है (Our Nation is Birthplace of our Culture) । प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया ।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की नीतियों और प्रयासों के केंद्र में देश के युवा हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि चिन्मय अमृत महोत्सव के आयोजन में भी युवाओं ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि अनेक युवा स्वयंसेवकों ने लगभग 300 दिनों में 40 हजार किलोमीटर की यात्रा की और इस दौरान एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क स्थापित किया। उन्होंने इस अभियान की सराहना करते हुए पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे उपनिषदों का कथन ‘वयं अमृतस्य पुत्राः’ है। इसका मतलब है कि हम अमृत की संतानें हैं। ये संकल्पना केवल आध्यात्मिक दर्शन नहीं है, यह हमारा सांस्कृतिक विश्वास भी है। इसका अर्थ है कि हमारी चेतना अमर है। हमारा ज्ञान और बोध अमर है। इसी बोध के कारण ये भारत भी हजारों वर्षों से अमर बना हुआ है, क्योंकि भारत शब्द का अर्थ ही यही है कि जो ज्ञान और प्रकाश के अनुसंधान में लगा हो। इसीलिए जब देश की आजादी के 75 वर्ष का अवसर आया तो मेरे मन में विचार आया कि हमें इस अवसर को विकसित भारत का प्रेरणा मंच तो बनाना ही है और हमें भारत के उस स्वरूप को जीवंत करना है, जो अमृत विचारों को जीना जानता है।”
पीएम ने कहा, “मैंने उस उत्सव को ‘अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाने का आह्वान किया था। समय के साथ-साथ एक के बाद एक अद्भुत यात्राएं उस संकल्प से जुड़ती चली जा रही हैं। कितने ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संगठनों ने इस दौरान अपनी यात्रा के अहम पड़ावों पर ‘अमृत संकल्प’ लिए और अब चिन्मय मिशन भी अमृत महोत्सव के रूप में भारत के अमृतकाल के अभियान से जुड़ रहा है। भारत के संकल्पों की असली ताकत यही है। यही तो हमारे ‘अमृतस्य पुत्राः’ होने का प्रमाण है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे वेदों का ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः’ आह्वान है। इसका मतलब है कि राष्ट्र का हित चाहने वाले हम लोग राष्ट्र को जागृत और उन्नत बनाएं। स्वामी चिन्मयानंद ने अपना पूरा जीवन इसी मंत्र को लेकर जिया। वे जितनी श्रद्धा से आध्यात्मिक विषयों पर बोलते थे, उतनी ही तत्परता से वे राष्ट्र के विषयों पर भी मुखर होकर व्याख्यान देते थे। हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मभूमि है। राष्ट्र ही हमारे अस्तित्व का आधार है। स्वामी जी ने हमेशा यह शिक्षा दी। हम अपनी आध्यात्मिक उन्नति को व्यक्तिगत उन्नति से जोड़ें और व्यक्तिगत उन्नति को राष्ट्र की प्रगति का माध्यम बनाएं।”
पीएम ने कहा, “भारत के लोगों को भारत के प्रति स्वाभिमान से भरना स्वामी जी का मिशन था। उन्होंने हमारे शास्त्रों के ज्ञान को जनसामान्य तक पहुँचाने का अभियान शुरू किया। आज उनके उस संकल्प का परिणाम हमें दिखाई दे रहा है। चिन्मय मिशन के प्रयासों से आज लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर का काम कर रहे हैं। ये युवा भारतीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचा रहे हैं। गुरुदेव का ये योगदान भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। 2015 में मुझे उनकी स्मृति में एक विशेष सिक्का जारी करने का सौभाग्य मिला था। मैंने तब भी कहा था कि स्वामी जी का जीवन ज्ञान, कर्म और भक्ति का अद्भुत संगम था।” उन्होंने कहा, “उनके गुरु स्वामी शिवानंद ने उन्हें आशीर्वाद दिया था। उन्होंने अपना पूरा जीवन उसी भाव में जिया। उनकी वाणी में आत्मविश्वास और आंतरिक बल था। वह हर किसी के हृदय पर उनके विचारों की छाप छोड़ जाती थी। महान लोगों का मिशन उनके बाद भी सजीव रहता है।”
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